Ganesh Chalisa
श्री गणेश चालीसा
About Ganesh Chalisa
Ganesh Chalisa (श्री गणेश चालीसा) is a sacred 40-verse devotional hymn dedicated to Lord Ganesha. Rooted in Traditional / Lok Parampara, this composition carries deep spiritual significance. Chanting this stotra with devotion is said to daily recitation brings honour and respect in society as well as remove all obstacles from life and ensure success in endeavors. Additionally, it is known to grant wisdom, knowledge, and clarity of intellect. It is especially recommended on Wednesday (Budhvar) and during Ganesh Chaturthi and Diwali for maximum spiritual benefit. The text contains 40 verses and takes around 15 minutes to recite, fitting conveniently into a daily spiritual routine. On this page, you can read the complete Ganesh Chalisa in Devanagari Sanskrit with English transliteration, Hindi meaning (arth), and free PDF download for offline recitation.
Reviewed & translated by Acharya Pushyadant Mishra
Stotra Path (स्तोत्र पाठ)
॥ श्री गणेश चालीसा ॥
॥ दोहा ॥
जय गणपति सदगुण सदन, कविवर बदन कृपाल।
विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल॥
जय जय जय गणपति गणराजू।
मंगल भरण करण शुभ काजू॥
॥ चौपाई ॥
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूरति रूप।
विकट शरीर सुण्ड सुवर्ण, रक्तांबर अनूप॥
पान चढ़त पयोधि मथत, लड्डू भोग लगात।
महिमा अगम अनंत तव, कहत वेद गुण गात॥
चतुर्भुज गजबदन विशाला।
नागर मुकुट एक दन्ताला॥
मस्तक सिन्दूर सोहात।
मूसक वाहन सोभित बाता॥
सुर बासव सब ही विधि ध्यावत।
क्षण क्षण ही प्रभु पद नित गावत॥
संकट कटत मिटत सब पीरा।
गणपति बिरद सम्हारो धीरा॥
जय जय जय गणपति गणराजू।
मंगल भरण करण शुभ काजू॥
बाल समय रवि भक्षि लियो तब,
तीनों लोक भयो अँधियारो॥
ताहि सू त्रास भयो जब देवन,
मुख छाड़ी रवि कष्ट निवारो॥
पार्वती जब पूजन कीनो,
तुम प्रथम बैठे तब जानो॥
पूजन बिना ठौर नहिं पावैं,
प्रथम पूजहि सब सुख लावैं॥
जय जय जय गणपति गणराजू।
मंगल भरण करण शुभ काजू॥
अष्टों सिद्धि दासी ग्रह चेरी,
शापित करत शत्रु सब नाशत॥
सुन्दर विमल बुद्धि दो माता,
कविवर बदन कृपा करो तात॥
भूत पिशाच न तिहरे आवे,
महावीर जब नाम सुनावे॥
नासैं रोग हरै सब पीरा,
जपत निरन्तर हनुमत बीरा॥
संकट तें हनुमान छुड़ावै,
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥
जय जय जय गणपति गणराजू।
मंगल भरण करण शुभ काजू॥
रिद्धि सिद्धि तुम्हारी चहेटी।
तुम मात पिता तुम ही मोरे॥
तुम बिन और न कोउ मेरो,
मैं सेवक तुम स्वामी मेरो॥
प्रभु तुम्हारी शरण में आयो,
कृपा करो महिमा बहु गायो॥
विघ्न विनाशक मंगल कारी,
कृपा करहु बहु बलिहारी॥
जय जय जय गणपति गणराजू।
मंगल भरण करण शुभ काजू॥
तुम प्रथम पूज्य सुरेश्वर,
ज्ञान विद्या के दाता।
आदि देव अक्षय तुम्हीं हो,
समस्त सृष्टि के विधाता॥
मोदक प्रिय गणेश गजानन,
तुम्हें तिलक चढ़ावें।
मंगलमूर्ति सदा सुखकारी,
सब जग तोहि मनावें॥
जय जय जय गणपति गणराजू।
मंगल भरण करण शुभ काजू॥
तुम हो सिद्धि विनायक देवा,
तुम्हारी सब करत सेवा।
भक्तन को आनन्द पहुँचावो,
कृपा कर सब काज सँवारो॥
सब पर कृपा दृष्टि जब करही,
करही विपत्ति भक्तन की हरही।
संकट हरत सदा बलशाली,
जय जय जय गणपति गणराजू॥
कीजै नित्य गणेश की पूजा,
आन देव नहिं कोई दूजा।
बारह महीने पूजा करके,
विद्या वैभव लें सब हरके॥
सब गुण धाम गणेश सहायक,
मोदक भोग सदा बल दायक।
हरि ॐ तत्सत जय जय गणपति,
मंगल करत सदा निर्भय हो॥
जय जय जय गणपति गणराजू।
मंगल भरण करण शुभ काजू॥
॥ दोहा ॥
सुनै गणेश चालीसा, पाठ करै धर ध्यान।
नित नव मंगल गृह बसै, लहे जगत सम्मान॥
सम्बन्धी सब सुख करै, विघ्न विनाशन होय।
सुख सम्पत्ति घर आवहीं, जय कानन के होय॥
॥ इति श्री गणेश चालीसा सम्पूर्ण ॥
Benefits (फल)
- ★Removes all obstacles from life and ensures success in endeavors
- ★Bestows Riddhi-Siddhi (prosperity and spiritual attainment)
- ★Grants wisdom, knowledge, and clarity of intellect
- ★Brings peace, happiness, and harmony in the household
- ★Destroys negativity and protects from evil forces
- ★Daily recitation brings honour and respect in society
