Budhvar Vrat Katha (Wednesday Fasting Story)
बुधवार व्रत कथा
About Budhvar Vrat Katha (Wednesday Fasting Story)
Dedicated to Lord Ganesha, the Budhvar Vrat Katha (Wednesday Fasting Story) (बुधवार व्रत कथा) is a sacred prayer revered in Hindu tradition. Attributed to Ganesha Purana, this prayer holds a special place in Hindu devotional literature. Devotees recite this prayer to remove obstacles, gain wisdom, and achieve prosperity through the blessings of Lord Ganesha and Budh Grah. This prayer is traditionally recited on Wednesday (Budhvar) and during Ganesh Chaturthi and Sankashti Chaturthi to invoke divine grace. At 16 verses long, the recitation takes roughly 11 minutes, making it accessible for regular devotional use. On this page, you can read the complete Budhvar Vrat Katha (Wednesday Fasting Story) in Devanagari Hindi with English transliteration, Hindi meaning (arth), and free PDF download for offline recitation.
Reviewed & translated by Acharya Pushyadant Mishra
Stotra Path (स्तोत्र पाठ)
॥ श्री बुधवार व्रत कथा ॥
ॐ गं गणपतये नमः॥
॥ व्रत विधि ॥
बुधवार का व्रत भगवान श्री गणेश और बुध ग्रह को समर्पित है। इस दिन प्रातःकाल स्नान करके हरे वस्त्र धारण करें। गणेश जी को दूर्वा, मोदक और लड्डू अर्पित करें। दिन में एक समय भोजन करें। हरे मूँग का दान करें। सायंकाल कथा सुनें।
॥ कथा ॥
बहुत पुरानी बात है, एक नगर में एक व्यापारी रहता था। पहले उसका व्यापार बहुत अच्छा चलता था, परन्तु समय के साथ उस पर बहुत कर्ज हो गया। उसकी दुकान में ग्राहक आने बन्द हो गए, लेनदार तंग करने लगे और घर में कलह रहने लगी। व्यापारी बहुत चिन्तित और दुःखी रहता था। उसने बहुत प्रयास किए परन्तु कोई उपाय काम नहीं आया।
एक दिन वह व्यापारी निराश होकर नदी किनारे बैठा था। वहाँ एक वृद्ध ब्राह्मण आए। उन्होंने व्यापारी का उदास चेहरा देखकर पूछा — बेटा, तुम इतने दुःखी क्यों हो? व्यापारी ने अपनी सारी व्यथा बता दी। ब्राह्मण ने कहा — बेटा, तुम्हारी कुण्डली में बुध ग्रह कमजोर है। तुम बुधवार का व्रत करो और भगवान गणेश की पूजा करो। सब ठीक हो जाएगा।
ब्राह्मण ने व्रत की विधि बताई — प्रत्येक बुधवार को प्रातःकाल स्नान करके हरे वस्त्र पहनो। गणेश जी की मूर्ति के सामने दूर्वा और मोदक रखो। ॐ गं गणपतये नमः मन्त्र का जाप करो। दिनभर व्रत रखो और शाम को एक बार भोजन करो। हरे मूँग और हरी सब्जी का दान करो। इक्कीस बुधवार तक यह व्रत पूरी श्रद्धा से करो।
व्यापारी ने ब्राह्मण की बात मान ली। अगले बुधवार से उसने व्रत रखना शुरू किया। वह सुबह उठकर स्नान करता, हरे कपड़े पहनता और गणेश जी की पूजा करता। दूर्वा की इक्कीस पत्तियाँ चढ़ाता, मोदक का भोग लगाता और मन्त्र जाप करता। शाम को कथा सुनता और हरे मूँग का दान करता।
पहले बुधवार को ही उसकी दुकान पर एक बड़ा ग्राहक आया और अच्छा सौदा हुआ। दूसरे बुधवार तक उसके पुराने ग्राहक वापस आने लगे। व्यापारी का विश्वास और बढ़ गया। वह नित्य गणेश जी का स्मरण करता और बुधवार के व्रत का कड़ाई से पालन करता।
सात बुधवार बीतते-बीतते व्यापारी का आधा कर्ज चुक गया। ग्यारहवें बुधवार तक उसका व्यापार पहले से भी अधिक अच्छा चलने लगा। घर में सुख-शान्ति आ गई। पत्नी और बच्चे प्रसन्न रहने लगे। लेनदार सन्तुष्ट हो गए।
इक्कीसवें बुधवार को व्यापारी ने विधिपूर्वक उद्यापन किया। उसने ब्राह्मणों को भोजन कराया, गरीबों को दान दिया और गणेश जी का विशेष अभिषेक कराया। उस रात उसे स्वप्न में भगवान गणेश ने दर्शन दिए और कहा — वत्स, तुमने सच्ची श्रद्धा से मेरी पूजा की है। मैं तुम्हारे सब विघ्न सदा के लिए दूर करता हूँ। तुम्हारे व्यापार में कभी हानि नहीं होगी। बुद्धि और विवेक से सदा सही निर्णय लोगे।
व्यापारी जाग उठा और उसने गणेश जी को प्रणाम किया। उस दिन से उसने आजीवन बुधवार का व्रत रखने का संकल्प लिया। उसका व्यापार दूर-दूर तक फैल गया, घर में सुख-समृद्धि आई और उसने अपने नगर में गणेश जी का एक सुन्दर मन्दिर भी बनवाया।
॥ कथा सार ॥
जो व्यक्ति प्रत्येक बुधवार को सच्चे मन से भगवान गणेश का व्रत करता है, दूर्वा और मोदक अर्पित करता है, हरे वस्त्र धारण करता है और दान करता है, उसके सभी विघ्न दूर होते हैं। बुद्धि, ज्ञान, व्यापार में लाभ और जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।
॥ इति श्री बुधवार व्रत कथा सम्पूर्णा ॥
Benefits (फल)
- ★Traditional fasting story for Wednesday (Budhvar) dedicated to Lord Ganesha
- ★Removes all obstacles (Vighn Vinashak) from life, career, and business
- ★Strengthens weak Mercury (Budh Grah) in one's horoscope for better intellect
- ★Especially powerful during Ganesh Chaturthi and Sankashti Chaturthi
- ★Listening to the Katha is an integral part of the Budhvar Vrat
- ★Grants wisdom, knowledge, business prosperity, and family harmony
