Guruvar Vrat Katha (Thursday Fasting Story)
गुरुवार व्रत कथा
About Guruvar Vrat Katha (Thursday Fasting Story)
Dedicated to Lord Vishnu, the Guruvar Vrat Katha (Thursday Fasting Story) (गुरुवार व्रत कथा) is a sacred prayer revered in Hindu tradition. This revered text originates from Skanda Purana. Regular recitation is believed to pacify afflictions of Jupiter (Brihaspati/Guru Graha), remove obstacles in marriage and ensure good spouse, and grant wealth, education, children, and marital harmony. This sacred text is ideally recited on Thursday (Guruvar) for enhanced blessings. Comprising 12 verses, it can be completed in approximately 10 minutes, making it suitable for daily devotional practice. On this page, you can read the complete Guruvar Vrat Katha (Thursday Fasting Story) in Devanagari Sanskrit with English transliteration, Hindi meaning (arth), and free PDF download for offline recitation.
Reviewed & translated by Acharya Pushyadant Mishra
Stotra Path (स्तोत्र पाठ)
॥ श्री गुरुवार व्रत कथा ॥
ॐ बृहस्पतये नमः। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥
॥ व्रत विधि ॥
गुरुवार (बृहस्पतिवार) का व्रत भगवान विष्णु और बृहस्पति देव को समर्पित है। प्रातःकाल स्नान करके पीले वस्त्र धारण करें। केले के वृक्ष या भगवान विष्णु की पूजा करें। पीले फूल, चने की दाल, गुड़ और हल्दी अर्पित करें। एक समय भोजन करें, भोजन में चने की दाल अवश्य हो। सायंकाल कथा सुनें।
॥ कथा ॥
प्राचीन काल में एक बहुत बड़ा राजा था। वह बड़ा धर्मात्मा था।
प्रत्येक गुरुवार को व्रत रखता और दान-पुण्य करता था।
उसकी रानी बहुत लोभी थी। न व्रत करती, न दान करती,
और राजा को भी व्रत करने से रोकती थी॥
एक समय बृहस्पतिदेव एक साधु का वेश धारण करके
रानी के पास आये और भिक्षा माँगी। रानी ने कहा —
हे साधु, मैं इस दान-पुण्य से तंग आ गई हूँ।
कोई ऐसा उपाय बताइए कि सारा धन नष्ट हो जाए
तो मुझे दान न करना पड़े॥
साधु रूपी बृहस्पतिदेव ने कहा — हे रानी, तू बड़ी विचित्र है।
धन-सम्पत्ति से कोई भी दुःखी नहीं होता।
यदि धन अधिक है तो गरीबों को दान कर, विद्यालय बनवा,
कुएँ-बावड़ी खुदवा। इससे तुझे पुण्य मिलेगा॥
रानी ने इसकी उपेक्षा की। परिणामस्वरूप सात दिन में
राजा का समस्त धन नष्ट हो गया। राज्य में अकाल पड़ा।
परिवार भूखों मरने लगा। राजा के सात पुत्र थे,
वे भी एक-एक करके बीमार पड़ने लगे॥
तब रानी को अपनी भूल का पश्चात्ताप हुआ।
उसने अपनी पड़ोसन से पूछा कि ऐसा क्यों हो रहा है?
पड़ोसन ने कहा — तूने गुरुवार का व्रत छोड़ दिया
और बृहस्पतिदेव का अपमान किया। इसलिए यह दशा है।
तू पुनः गुरुवार का व्रत कर और कथा सुन॥
रानी ने श्रद्धापूर्वक गुरुवार का व्रत किया। पीले वस्त्र पहने,
चने की दाल और गुड़ का प्रसाद बनाया। कथा सुनी।
बृहस्पतिदेव प्रसन्न हुए। धीरे-धीरे सब कुछ ठीक हो गया।
राजा का राज्य वापस मिला, पुत्र स्वस्थ हुए
और दोनों ने आजीवन गुरुवार का व्रत किया॥
॥ फलश्रुति ॥
जो व्यक्ति श्रद्धापूर्वक गुरुवार का व्रत करता है
और इस कथा को सुनता है, उसे धन, विद्या, सन्तान
और सर्वसुख की प्राप्ति होती है। बृहस्पति ग्रह की पीड़ा शान्त होती है
और गुरुवार व्रत से विवाह में आने वाली बाधाएँ दूर होती हैं।
॥ इति श्री गुरुवार व्रत कथा सम्पूर्णा ॥
Benefits (फल)
- ★Traditional fasting story for Thursday dedicated to Lord Vishnu and Brihaspati
- ★Grants wealth, education, children, and marital harmony
- ★Removes obstacles in marriage and ensures good spouse
- ★Pacifies afflictions of Jupiter (Brihaspati/Guru Graha)
- ★Yellow color, chana dal, and banana worship are integral to the vrat
- ★Listening to Katha completes the vrat and brings full merit
