Lakshmi Chalisa
लक्ष्मी चालीसा
About Lakshmi Chalisa
The Lakshmi Chalisa, known in Sanskrit as लक्ष्मी चालीसा, is a sacred 40-verse devotional hymn in praise of Goddess Lakshmi. Rooted in Traditional, this composition carries deep spiritual significance. Chanting this stotra with devotion is said to bring peace and harmony in the household as well as remove poverty and financial difficulties. Additionally, it is known to ensure continuous flow of fortune and good luck. This sacred text is ideally recited on Friday (Shukravar) and during Diwali for enhanced blessings. The text contains 42 verses and takes around 15 minutes to recite, fitting conveniently into a daily spiritual routine. On this page, you can read the complete Lakshmi Chalisa in Devanagari Sanskrit with English transliteration, Hindi meaning (arth), and free PDF download for offline recitation.
Reviewed & translated by Acharya Pushyadant Mishra
Stotra Path (स्तोत्र पाठ)
॥ दोहा ॥
मातु लक्ष्मी करि कृपा, करो हृदय में वास।
मनो कामना सिद्ध कर, पूरो मेरी आस॥
॥ चौपाई ॥
सिंधु सुता मैं सुमिरौं तोही।
कृपा करो जगजननि मोही॥
जग जननी मंगल करनी।
दुःख विनाशिनी त्रिभुवन धनी॥
क्षीर सिंधु जब विष्णु मथायो।
चौदह रत्न सिंधु में पायो॥
चौदह रत्न में तुम सुखरासी।
सेवा कियो प्रभु बनि दासी॥
जब जब जन्म जहाँ प्रभु लीन्हा।
तब तब जन्म तुम्हूँ लिए कीन्हा॥
प्रभु नरसिंह जब रूप बनायो।
तब लक्ष्मी तुम सीता कहायो॥
श्रीराम जब राम अवतारा।
तब सीता रूप तुमने धारा॥
श्यामसुंदर जब बने नंदलाल।
तब तुम बनीं राधा छवि वाल॥
दुर्गा रूप जब माता धारो।
तब भक्तन को संकट निवारो॥
जब भी प्रभु अवतार बनावैं।
तबही तुम साथ सदा आवैं॥
नित पूजों जो तुमको माई।
सो प्राणी सुख पावै भाई॥
जो जन ध्यान तुम्हारो लावै।
सो सम्पति अनेक घर पावै॥
सुन्दर बदन चतुर्भुजा धारी।
कमल पुष्प बर लोचन प्यारी॥
स्वर्ण मुकुट सिर सोहत नीको।
चंपा वर्ण शरीर सुठ ठीको॥
गले मोतिन की माला रहती।
शोभा बहुत मनोहर लगती॥
सुन्दर साड़ी नयनाभिरामा।
अंग अंग शोभित सुख धामा॥
उर पर कमल कमल पर बिराजै।
गज राज वाहन सोहत साजै॥
करुणा निधि सुख सम्पत्ति दानी।
दीनन को तुम ही जग जानी॥
महालक्ष्मी एक नाम तुम्हारा।
तीनों लोक रहा उजियारा॥
महाकाली महा विद्या कहायो।
कमला नाम जगत में पायो॥
विष्णुप्रिया हरि मन भायो।
संकट सब तुम ही मिटायो॥
नमो लक्ष्मी नमो नमो माता।
मैं हूँ अनाथ तू जगत विधाता॥
जो कोई चालीसा पढ़ माता।
उसको तुम लक्ष्मी सुख दाता॥
जो कोई गावै सुनै सुनावै।
सो निश्चय लक्ष्मी वर पावै॥
रिद्धि सिद्धि बहु सम्पत्ति पावै।
घर में सुख शान्ति सदा आवै॥
कर जोरी विनय सुनो भगवती।
रामदास तुम्हरो गुण गाती॥
शरणागत में शरण तुम्हारी।
करो हमारी सदा सहायी॥
कष्ट निवारो नित जग माता।
कृपा करो जगजननी दाता॥
विनय करूँ मैं कर जोड़ तुम्हारी।
सुनो देवि मैं बलिहारी॥
त्रिभुवनधनी जगत की माता।
सुख सम्पत्ति सदा सुखदाता॥
॥ दोहा ॥
यह लक्ष्मी चालीसा पढ़े, लक्ष्मी वास सदा।
सुख सम्पत्ति बहु पावहीं, नहीं रहे कछु दा॥
Benefits (फल)
- ★Bestows wealth, prosperity, and abundance in life
- ★Removes poverty and financial difficulties
- ★Brings peace and harmony in the household
- ★Fulfills all material and spiritual desires
- ★Grants the divine grace of Goddess Lakshmi
- ★Ensures continuous flow of fortune and good luck
