Meera Bhajan - Key Verses
मीरा भजन (प्रमुख पद)
About Meera Bhajan - Key Verses
The Meera Bhajan - Key Verses, known in Sanskrit as मीरा भजन (प्रमुख पद), is a sacred prayer in praise of Lord Krishna. Attributed to Sant Meerabai - Meera Padavali, this prayer holds a special place in Hindu devotional literature. Chanting this stotra with devotion is said to inspire complete surrender and selfless devotion as well as remove all forms of worldly attachment. Additionally, it is known to grant fearlessness in the face of worldly opposition. This prayer is traditionally recited on Wednesday (Budhvar) and Friday (Shukravar) and during Janmashtami, Holi, and Radha Ashtami to invoke divine grace. The text contains 7 verses and takes around 12 minutes to recite, fitting conveniently into a daily spiritual routine. On this page, you can read the complete Meera Bhajan - Key Verses in Devanagari Sanskrit with English transliteration, Hindi meaning (arth), and free PDF download for offline recitation.
Reviewed & translated by Acharya Pushyadant Mishra
Stotra Path (स्तोत्र पाठ)
॥ श्री मीरा भजन — प्रमुख पद ॥
(सन्त मीराबाई)
॥ भजन १ — पायो जी मैंने ॥
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो।
वस्तु अमोलक दी मेरे सतगुरु किरपा करि अपनायो॥
जनम जनम की पूँजी पाई जग में सभी खोवायो।
खरचै नहिं कोई चोर न लूटै दिन दिन बढ़त सवायो॥
सत की नाव खेवटिया सतगुरु भवसागर तर आयो।
मीरा के प्रभु गिरधर नागर हरख हरख जस गायो॥ १॥
॥ भजन २ — मेरे तो गिरधर गोपाल ॥
मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई।
जाके सिर मोर मुकुट मेरो पति सोई॥
तात मात भ्रात बन्धु आपनो न कोई।
छाँड़ि दई कुल की कानि कहा करिहै कोई॥
सन्तन ढिग बैठि बैठि लोक लाज खोई।
चुनरी के किये टुक ओढ़ लीन्हीं लोई॥
मोती मूँगे उतार बनमाला पोई।
अंसुवन जल सींचि सींचि प्रेम बेलि बोई॥
दधि मथि घृत काढ़ि लियो डारि दई छोई।
भगत देखि राजी हुई जगत देखि रोई॥
मीरा के प्रभु गिरधर नागर सहज मिले मोही॥ २॥
॥ भजन ३ — हरि तुम हरो ॥
हरि तुम हरो जन की पीर।
द्रौपदी की लाज राखी आप बढ़ायो चीर॥
भक्त कारण रूप नरहरि धरयो आप शरीर।
हिरण्याकुश मारि दीन्हो धरि नाहिन धीर॥
बूडते गजराज राखे काटी कुंजर पीर।
दासी मीरा लाल गिरधर दुख जहाँ तहाँ फीर॥ ३॥
॥ भजन ४ — बसो मेरे नैनन में ॥
बसो मेरे नैनन में नन्दलाल।
मोहनी मूरत साँवरी सूरत नैना बने विशाल॥
अधर सुधारस मुरली राजत उर बैजन्ती माल।
क्षुद्र घंटिका कटि तट शोभित नूपुर शब्द रसाल॥
मीरा प्रभु संतन सुखदाई भक्त बछल गोपाल॥ ४॥
॥ भजन ५ — जोगी मत जा ॥
जोगी मत जा मत जा मत जा।
तेरे बिछड़ने की बेला में क्या करूँ क्या करूँ बता॥
मीरा दासी जनम जनम की पैंया पड़ूँ बार बार।
मीरा के प्रभु गिरधर नागर चरण कमल बलिहार॥ ५॥
॥ भजन ६ — कर ले हरि का ध्यान ॥
मन रे परसि हरि के चरण।
सुभग सीतल कमल कोमल त्रिविध ज्वाला हरण॥
जिन चरणन ऊपर बलि ब्रह्मा जिन चरणन ऊपर बलि इन्द्र।
जिन चरणन धोइ धोइ पीवत शिव उसे आवत परमानन्द॥
मीरा के प्रभु गिरधर नागर उन चरणन की शरण॥ ६॥
॥ भजन ७ — मैं गिरधर के घर जाऊँ ॥
मैं गिरधर के घर जाऊँ।
गिरधर मिलिया मनड़ो हर लियो अब कहाँ जाऊँ मैं कहाँ जाऊँ॥
लोग कहे मीरा भई बावरी सास कहे कुलनाशी।
विषको प्याला राणाजी भेज्यो पीवत मीरा हाँसी॥
मीरा के प्रभु गिरधर नागर शरणों तेरे आऊँ॥ ७॥
॥ इति श्री सन्त मीराबाई भजन प्रमुख पद सम्पूर्ण ॥
Benefits (फल)
- ★Awakens the purest form of devotional love (Prema Bhakti)
- ★Grants fearlessness in the face of worldly opposition
- ★Purifies the heart through divine love poetry
- ★Brings the constant presence of Krishna in consciousness
- ★Removes all forms of worldly attachment
- ★Bestows the grace of Giridhar Gopal on the devotee
- ★Inspires complete surrender and selfless devotion
