Nag Panchami Vrat Katha
नाग पंचमी व्रत कथा
About Nag Panchami Vrat Katha
Nag Panchami Vrat Katha (नाग पंचमी व्रत कथा) is a sacred prayer dedicated to Lord Shiva and the Nag Devatas. Attributed to Bhavishya Purana, this prayer narrates how a farmer's daughter saved her entire family through sincere Nag worship on Shravan Panchami. Devotees recite this katha for protection from serpent fears and sarpa dosha nivaran. Recitation is particularly auspicious during Nag Panchami (Shravan Shukla Panchami). With a reading time of about 12 minutes, this prayer is essential for the annual Nag Panchami celebration. On this page, you can read the complete Nag Panchami Vrat Katha in Devanagari Hindi with English transliteration, Hindi meaning (arth), and free PDF download for offline recitation.
Reviewed & translated by Acharya Pushyadant Mishra
Stotra Path (स्तोत्र पाठ)
॥ श्री नाग पंचमी व्रत कथा ॥
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय। ॐ नमः शिवाय।
॥ माहात्म्य ॥
श्रावण मास शुक्ल पक्ष की पंचमी को नाग पंचमी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन नाग देवता की पूजा की जाती है, उन्हें दूध चढ़ाया जाता है और सर्पभय से मुक्ति तथा सर्पदोष निवारण के लिए प्रार्थना की जाती है। भगवान शिव के गले में नाग विराजमान हैं और भगवान विष्णु शेषनाग पर शयन करते हैं — इसलिए नागों की पूजा शिव और विष्णु दोनों को प्रसन्न करती है।
॥ कथा ॥
बहुत समय पहले की बात है। एक गाँव में एक किसान अपने परिवार के साथ रहता था। उसके तीन बेटे और एक बेटी थी। बेटी का विवाह हो चुका था और वह ससुराल में रहती थी।
एक दिन बड़ा बेटा खेत में हल चला रहा था। हल की नोक से एक नाग का बिल उजड़ गया। बिल में नागिन के छोटे-छोटे बच्चे थे। हल की चोट से सारे नाग-शिशु मर गए।
जब नागिन शाम को लौटी और अपने बच्चों को मरा हुआ पाया तो उसका क्रोध असीम हो गया। उसने अपने बच्चों के रक्त की गन्ध से हल चलाने वाले का पता लगाया।
उसी रात नागिन ने किसान के घर में प्रवेश किया। उसने किसान को, उसकी पत्नी को और तीनों बेटों को डस लिया। सुबह तक सारा परिवार मृत्यु को प्राप्त हो गया।
किन्तु नागिन की आग अभी बुझी नहीं थी। वह किसान की बेटी को भी डसना चाहती थी। नागिन ससुराल की ओर चल पड़ी।
किसान की बेटी बहुत धर्मपरायण स्त्री थी। उस दिन श्रावण शुक्ल पंचमी थी। उसने प्रातःकाल स्नान करके नाग देवता की पूजा की थी। उसने मिट्टी से नाग की प्रतिमा बनाकर उस पर दूध चढ़ाया, हल्दी-कुमकुम लगाया और फूल अर्पित किए।
उसने सच्चे मन से प्रार्थना की — "हे नाग देवता! मेरे परिवार की रक्षा करें। सभी प्राणियों का कल्याण हो।"
जब नागिन उसके घर पहुँची तो उसने देखा कि द्वार पर नाग-पूजा का सामान रखा है, दूध का कटोरा है और स्त्री भक्तिभाव से नागों की स्तुति कर रही है।
नागिन का क्रोध शान्त हो गया। वह प्रकट हुई और बोली — "हे देवी! तुम्हारे भाई ने मेरे बच्चों को मारा। मैंने तुम्हारे पूरे परिवार को डस लिया। किन्तु तुम्हारी नाग-भक्ति देखकर मेरा हृदय पिघल गया। तुम्हारी पूजा से मैं प्रसन्न हूँ।"
किसान की बेटी रोते हुए बोली — "हे नागमाता! मेरे भाई से अनजाने में अपराध हुआ। कृपया मेरे परिवार को क्षमा करें और उन्हें जीवनदान दें।"
नागिन बोली — "तुम्हारी सच्ची भक्ति और नाग-पूजा के प्रभाव से मैं तुम्हारे पूरे परिवार को जीवित करती हूँ। आज से जो कोई श्रावण पंचमी को नाग-पूजा करेगा, दूध चढ़ाएगा, उसे कभी सर्पभय नहीं होगा।"
नागिन ने किसान और उसके पूरे परिवार को पुनर्जीवित कर दिया।
तभी से प्रत्येक वर्ष श्रावण शुक्ल पंचमी को नाग पंचमी मनाई जाती है। लोग नाग देवता की पूजा करते हैं, दूध चढ़ाते हैं और सर्पभय से मुक्ति पाते हैं।
॥ व्रत विधि ॥
श्रावण शुक्ल पंचमी को व्रत रखें।
दीवार या चौकी पर नाग देवता का चित्र बनाएँ।
दूध, फूल, हल्दी-कुमकुम, अक्षत से पूजा करें।
नागों को दूध अर्पित करें।
कथा सुनें और प्रसाद बाँटें।
इस दिन खेत में हल न चलाएँ।
॥ इति श्री नाग पंचमी व्रत कथा सम्पूर्णा ॥
Benefits (फल)
- ★Removes sarpa dosha (serpent affliction) and protects from snake-related fears
- ★Nag Devata worship pleases both Shiva (who wears Vasuki) and Vishnu (who rests on Shesha)
- ★Celebrated on Shravan Shukla Panchami — the holiest day for serpent worship
- ★Offering milk to Nag Devata grants protection to the entire family
- ★Frees from Kaal Sarpa Dosha when observed with sincere devotion
- ★Listening to the katha is integral to Nag Panchami observance
