Shree Shiva — the destroyer and transformer in the Hindu trinityShree Shiva

Pradosh Vrat Katha

प्रदोष व्रत कथा

10 min read15 versesSource: Shiva Purana

About Pradosh Vrat Katha

Pradosh Vrat Katha — प्रदोष व्रत कथा — is a sacred prayer offered to Lord Shiva. This sacred composition is sourced from Shiva Purana and continues to inspire devotees worldwide. Regular recitation is believed to connected to the origin of Somnath Jyotirlinga — the first among twelve, grant progeny to the childless, as narrated in the Brahmana couple story, and som Pradosha for mental peace, Bhaum Pradosha for health, Shani Pradosha for children. For best results, devotees chant this during Maha Shivaratri and Pradosh. Comprising 15 verses, it can be completed in approximately 10 minutes, making it suitable for daily devotional practice. On this page, you can read the complete Pradosh Vrat Katha in Devanagari Sanskrit with English transliteration, Hindi meaning (arth), and free PDF download for offline recitation.

Reviewed & translated by Acharya Pushyadant Mishra

Stotra Path (स्तोत्र पाठ)

॥ श्री प्रदोष व्रत कथा ॥

॥ शिव पुराण अनुसार ॥

॥ प्रदोष व्रत माहात्म्य ॥

सूत जी बोले — हे मुनिगण! अब मैं प्रदोष व्रत का माहात्म्य सुनाता हूँ जो शिव पुराण में भगवान शिव ने स्वयं माता पार्वती को सुनाया था।

त्रयोदशी तिथि को सन्ध्याकाल (प्रदोष काल) में भगवान शिव की पूजा करने से अनन्त फल की प्राप्ति होती है।

॥ कथा प्रारम्भ ॥

प्राचीन काल में विदर्भ देश में एक धर्मात्मा ब्राह्मण अपनी पत्नी के साथ रहता था। उनके कोई सन्तान नहीं थी। उन्होंने अनेक तीर्थ किये, अनेक देवताओं की उपासना की, किन्तु सन्तान सुख प्राप्त न हुआ।

एक दिन नारद मुनि उनके आश्रम में पधारे। ब्राह्मण दम्पति ने उनकी सेवा की और अपना दुःख बताया। नारद मुनि बोले — "हे ब्राह्मण! तुम प्रदोष व्रत करो। प्रत्येक त्रयोदशी को दिन में उपवास करो और सन्ध्याकाल में भगवान शिव की विधिवत पूजा करो।"

"अभिषेक करो — जल, दूध, दही, घी, मधु और शर्करा से। बिल्वपत्र, धतूरा, आक के पुष्प चढ़ाओ। प्रदोष काल में शिव-पार्वती, नन्दी और गणेश सहित शंकर का ध्यान करो। ॐ नमः शिवाय मन्त्र का जाप करो।"

ब्राह्मण दम्पति ने श्रद्धापूर्वक प्रदोष व्रत आरम्भ किया। प्रथम प्रदोष पर उन्होंने शिवलिंग पर अभिषेक किया, बिल्वपत्र चढ़ाये, उपवास रखा और सन्ध्या पूजा की।

छह मास तक निरन्तर प्रदोष व्रत करने के बाद भगवान शिव प्रसन्न हुए। उन्होंने स्वप्न में दर्शन देकर कहा — "हे भक्त! मैं तुम्हारे व्रत और भक्ति से प्रसन्न हूँ। तुम्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति होगी जो धर्मात्मा, विद्वान और दीर्घायु होगा।"

यथासमय उन्हें सुन्दर पुत्र की प्राप्ति हुई। वह बालक बड़ा होकर वेदों का ज्ञाता, धर्मात्मा और प्रजापालक राजा बना।

॥ द्वितीय कथा — चन्द्रमा का प्रदोष व्रत ॥

समुद्र मन्थन में चन्द्रमा प्रगट हुए। दक्ष प्रजापति ने अपनी सत्ताईस कन्याएँ (नक्षत्र) चन्द्रमा को ब्याही। किन्तु चन्द्रमा केवल रोहिणी से प्रेम करते थे। अन्य पत्नियों ने पिता से शिकायत की। दक्ष ने चन्द्रमा को श्राप दिया — "तुम क्षयग्रस्त होओगे!"

चन्द्रमा क्षीण होने लगे। व्याकुल होकर उन्होंने नारद मुनि से उपाय पूछा। नारद बोले — "प्रभासक्षेत्र (सोमनाथ) में जाकर भगवान शिव का प्रदोष व्रत करो।"

चन्द्रमा ने प्रभास क्षेत्र में शिवलिंग की स्थापना कर प्रदोष व्रत किया। भगवान शिव प्रसन्न हुए और बोले — "तुम पूर्ण क्षीण नहीं होओगे। कृष्णपक्ष में क्षीण होकर शुक्लपक्ष में पुनः पूर्ण होओगे।" तभी से चन्द्रमा की कलाएँ घटती-बढ़ती हैं।

वही शिवलिंग सोमनाथ महादेव कहलाया — ज्योतिर्लिंगों में प्रथम।

॥ प्रदोष व्रत विधि संक्षेप ॥

त्रयोदशी के दिन प्रातः स्नान करके संकल्प लें।

दिन भर उपवास रखें (फलाहार या निराहार)।

सन्ध्याकाल (प्रदोष काल) में शिवलिंग पर पंचामृत अभिषेक करें।

बिल्वपत्र, धतूरा, आक पुष्प, चन्दन अर्पित करें।

धूप-दीप-नैवेद्य अर्पण करें।

शिव पंचाक्षर मन्त्र 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करें।

प्रदोष व्रत कथा सुनें।

ब्राह्मण भोजन कराकर दक्षिणा दें।

॥ फल ॥

सोम प्रदोष (सोमवार) — चन्द्र दोष शान्ति, मन की शान्ति।

भौम प्रदोष (मंगलवार) — रोग निवारण, ऋण मुक्ति।

शनि प्रदोष — सन्तान प्राप्ति, ग्रह शान्ति।

प्रत्येक प्रदोष — शिव कृपा, सर्व मनोकामना पूर्ति, मोक्ष प्राप्ति।

॥ इति श्री प्रदोष व्रत कथा सम्पूर्ण ॥

Benefits (फल)

  • Sacred vrat katha for Pradosha — observed on every Trayodashi (13th tithi)
  • Highly pleasing to Lord Shiva when observed during Pradosha Kala (twilight hour)
  • Grants progeny to the childless, as narrated in the Brahmana couple story
  • Removes planetary afflictions — different days of Pradosha have specific benefits
  • Som Pradosha for mental peace, Bhaum Pradosha for health, Shani Pradosha for children
  • Connected to the origin of Somnath Jyotirlinga — the first among twelve

Frequently Asked Questions

Common questions about Pradosh Vrat Katha

Pradosh Vrat Katha in Hindi with meaning. Shiva Purana story of Trayodashi fast for Lord Shiva with vidhi and benefits. It is dedicated to Shree Shiva (श्री शिव), the destroyer and transformer in the hindu trinity. lord of meditation and cosmic dance. This sacred hymn contains 15 verses and is sourced from Shiva Purana.