Radha Chalisa
राधा चालीसा
About Radha Chalisa
The Radha Chalisa, known in Sanskrit as राधा चालीसा, is a sacred 40-verse devotional hymn in praise of Goddess Radha. This sacred composition is sourced from Traditional Chalisa Sangrah and continues to inspire devotees worldwide. Regular recitation is believed to bless married couples with lasting love and harmony, deepen devotion and love for the divine, and bestow the highest form of devotion - Prema Bhakti. It is especially recommended on Wednesday (Budhvar) and Friday (Shukravar) and during Radha Ashtami, Holi, and Janmashtami for maximum spiritual benefit. With 42 verses and a reading time of about 14 minutes, this prayer is ideal for both daily worship and special occasions. On this page, you can read the complete Radha Chalisa in Devanagari Sanskrit with English transliteration, Hindi meaning (arth), and free PDF download for offline recitation.
Reviewed & translated by Acharya Pushyadant Mishra
Stotra Path (स्तोत्र पाठ)
॥ दोहा ॥
श्री राधा चरणन सरोज, मन में धरि ध्यान।
वृषभानु सुता जगत मात, कहूँ चालीसा गान॥
श्री कृष्ण प्रिया राधिके, तुम हो प्रेम अवतार।
करो कृपा अब दासन पर, हरो जगत दुख भार॥
॥ चौपाई ॥
जय जय राधा वृषभानु दुलारी।
श्री कृष्ण प्राणप्रिया सुखकारी॥
वृषभानु राय के घर जन्मीं।
कीर्ति दा माता सुत सुखरूमीं॥
बरसाना धाम तिहारा।
जहँ निवास करत सुखसारा॥
गोरा वरन मनोहर रूपा।
जगमग ज्योति अनूप अनूपा॥
नीला वसन सोहे तन ऊपर।
कमल नयन मुख चन्द्र मनोहर॥
मन्द मुस्कान अधर सोहे।
त्रिभुवन जन के मन को मोहे॥
कुण्डल मकर श्रवण में सोहे।
नासिका अग्र मोती जो मोहे॥
केश काले घने लम्बे सुन्दर।
वेणी फूल गूँथे अति मनहर॥
माथे बिन्दिया सिन्दूर विराजे।
पायल छनक पद कमल में साजे॥
कंगना बाजूबन्द विराजे।
हाथन में मेंहदी रचि साजे॥
गोपियन संग रास रचावे।
श्री कृष्ण संग वन में जावे॥
यमुना तट पर केलि करावें।
कदम्ब तरु तले बंसी बजावें॥
निधिवन कुंज में रास विलासा।
राधा कृष्ण का प्रेम प्रकाशा॥
गोपियन को प्रेम सिखावे।
भक्तन को प्रभु दर्श करावे॥
लीला रस की स्वामिनी तुम हो।
प्रेम भक्ति की दानिनी तुम हो॥
तुम बिन कृष्ण अधूरे रहते।
तुम बिन जगत न कछु कहते॥
श्रीमद्भागवत कथा सुहानी।
राधा कृष्ण प्रेम की बानी॥
चन्द्रावली से प्रीत निभावे।
ललिता विशाखा संग सुहावे॥
ब्रह्मा शिव शेष सब ध्यावें।
राधा पद रज शीश चढ़ावें॥
जो जन राधा शरण में आवे।
सो सब सुख सम्पदा पावे॥
प्रेम भक्ति का वर जो माँगे।
राधा कृपा से सब सुख पावे॥
कृष्ण कृपा बिन कछु न होई।
राधा कृपा बिन कृष्ण न कोई॥
राधा नाम जपत सुखदाई।
कृष्ण मिलन का पथ बतलाई॥
सकल मनोरथ पूरन होवें।
जो श्री राधा चालीसा बोवें॥
प्रेम के अंकुर हृदय में जागें।
राधा कृपा से सब दुख भागें॥
दम्पति प्रेम सदा बढ़ जावे।
राधा कृष्ण भजन जो गावे॥
संसार सागर से पार लगावे।
वैकुण्ठ धाम को पथ बतलावे॥
जय राधा रानी वृन्दावन वासी।
कृपा करो दीनन पर दासी॥
चालीसा राधा का गाये।
सो परम पद निश्चय पाये॥
॥ दोहा ॥
राधे राधे जपत रहो, मन में धरो विश्वास।
कृष्ण मिलन हो निश्चय, राधा करे प्रकाश॥
Benefits (फल)
- ★Deepens devotion and love for the divine
- ★Blesses married couples with lasting love and harmony
- ★Grants the grace of Radha Rani for Krishna bhakti
- ★Removes obstacles in matters of love and relationships
- ★Bestows the highest form of devotion - Prema Bhakti
