Ram Chalisa
श्री राम चालीसा
About Ram Chalisa
The Ram Chalisa, known in Sanskrit as श्री राम चालीसा, is a sacred 40-verse devotional hymn in praise of Lord Rama. This revered text originates from Traditional. Regular recitation is believed to remove all sorrows and mental afflictions, bring prosperity and auspiciousness to life, and grant the complete blessings of Lord Rama. This prayer is traditionally recited on Sunday (Ravivar) and Thursday (Guruvar) and during Ram Navami to invoke divine grace. With 13 verses and a reading time of about 12 minutes, this prayer is ideal for both daily worship and special occasions. On this page, you can read the complete Ram Chalisa in Devanagari Sanskrit with English transliteration, Hindi meaning (arth), and free PDF download for offline recitation.
Reviewed & translated by Acharya Pushyadant Mishra
Stotra Path (स्तोत्र पाठ)
॥ श्री राम चालीसा ॥
॥ दोहा ॥
श्री रामचन्द्र कृपालु कर, मन निवास हमार।
आतुर आरत जन भये, प्रभु तजो मतिभ्रम भार॥
॥ चौपाई ॥
जय राम रूप अतुलित बानी।
जय सीतापति जग हितकारी॥
जय सुर मुनि जन सुखदायक।
जय दशरथ पुत्र प्रभु नायक॥१॥
जय कौशल्या माता के लाला।
जय दशरथ प्रिय प्रतिपाला॥
जय सुख धाम राम रघुराई।
जय लक्ष्मण प्रिय सकल सुखदाई॥२॥
नाम राम रघुनाथ कहावौ।
त्रिभुवन में प्रभुताई गावौ॥
कौशल देश मथुरा निवासी।
रघुकुल तिलक दशरथ सुत रासी॥३॥
विश्वामित्र मख रक्षा कीन्ही।
ताड़का मारि सुकीर्ति नवीन्ही॥
गौतम नारि श्राप जब पायो।
पादरज धरि उद्धार करायो॥४॥
जनकपुर में धनुष चढ़ायो।
सीता जी का पाणि गृहायो॥
भार्गव के सब गर्व उतारे।
तात वचन हित बन पगु धारे॥५॥
पंचवटी में डेरा कीन्हा।
शूर्पणखा नासिका बिहीना॥
खर दूषण त्रिशिरा सँहारे।
सब खल दल प्रभु आपु निवारे॥६॥
मारीच मृग प्रपंच रचायो।
सीता हरि दसकंध लै जायो॥
जटायू की गति प्रभु जब देखी।
तब दया विश्रुत अंतर लेखी॥७॥
शबरी के फल प्रेम सुहाये।
निषाद राज मित्र गुण गाये॥
सुग्रीव को मित्र जब कीन्हा।
बालि बध प्रभु सहज बल दीन्हा॥८॥
हनुमत सम प्रिय भक्त पुरानो।
प्रभु ने प्रीति बिधि अति जानो॥
सागर पार गये कपि लंका।
सिया सुधि लाये हरे अशंका॥९॥
सेतु बनाय प्रभु लंक सिधारे।
दसमुख दल बल सकल संहारे॥
रावण मारि कीर्ति बिस्तारी।
लंकापति बिभीषन भयकारी॥१०॥
सीता सुद्ध अगनि परिखीन्हीं।
पुष्पक चढ़ि सब अवध प्रवीन्हीं॥
कोटि महोत्सव प्रभु तब कीन्हा।
राज सिंहासन आपु नवीन्हा॥११॥
लक्ष्मण भरत शत्रुघ्न सुहाये।
निज निज भाग विभूति बनाये॥
धर्म सुराज प्रभु किय सुख भारी।
लोक चतुर्दश भये सुखकारी॥१२॥
प्रभु के भजन भक्त सुख पावैं।
राम नाम जपि भव तरि जावैं॥
जो कोई राम चालीसा गावै।
सो सब सुख वैभव पावै॥१३॥
॥ दोहा ॥
राम नाम जपि ध्यान धरि, मिटहि कलेश विकार।
भगति ज्ञान बैराग्य युत, करहु मोक्ष के द्वार॥
जय जय श्री सीताराम, जय जय श्री हनुमान।
जय जय लक्ष्मण भरत प्रभु, जय जय श्री भगवान॥
Benefits (फल)
- ★Grants the complete blessings of Lord Rama
- ★Removes all sorrows and mental afflictions
- ★Bestows devotion, knowledge, and detachment
- ★Opens the door to liberation (moksha)
- ★Brings prosperity and auspiciousness to life
- ★Destroys all sins through the power of Rama's name
