Shani Chalisa
शनि चालीसा
About Shani Chalisa
The Shani Chalisa, known in Sanskrit as शनि चालीसा, is a sacred 40-verse devotional hymn in praise of Lord Shani Dev. Rooted in Traditional Hindu Prayer, this composition carries deep spiritual significance. Devotees recite this prayer to grant fulfillment of desires when recited on Saturdays and protect from planetary afflictions of Saturn. It is also said to bestow prosperity and remove poverty. This prayer is traditionally recited on Saturday (Shanivar) to invoke divine grace. Comprising 40 verses, it can be completed in approximately 12 minutes, making it suitable for daily devotional practice. On this page, you can read the complete Shani Chalisa in Devanagari Sanskrit with English transliteration, Hindi meaning (arth), and free PDF download for offline recitation.
Reviewed & translated by Acharya Pushyadant Mishra
Stotra Path (स्तोत्र पाठ)
॥ श्री शनि चालीसा ॥
॥ दोहा ॥
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम, देउ अभय वरदान॥
जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज।
करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज॥
॥ चौपाई ॥
जयति जयति शनिदेव दयाला।
करत सदा भक्तन प्रतिपाला॥
चार भुजा तनु श्याम विराजे।
माथे रतन मुकुट छबि छाजे॥
परम विशाल मनोहर भाला।
नील वस्त्र शिर सुन्दर माला॥
कर में गदा त्रिशूल कुठारा।
पल पल करत सृष्टि संहारा॥
कर में शोभित नीलम प्यारा।
भक्तन को वर देत अपारा॥
गिद्ध सवारी करत निराला।
शनि देव करत प्रतिपाला॥
सूर्यपुत्र छाया महतारी।
यम भ्राता करते हितकारी॥
दक्षिण दिशा के तुम ही स्वामी।
शनि देव तुम परम अंतर्यामी॥
बीस हजार योजन ऊपर जाना।
बैठ सिंहासन करत विधाना॥
तीनों लोक में डंका बाजे।
हैं सब ग्रह शनि के ही काजे॥
शनि बिना सब सून हैं सूना।
करत सदा रण में पैने लूना॥
सूर्य चन्द्र राहू ग्रह आवें।
शुक्र बुध तव चरण मनावें॥
जग में सकल किया तैं साजा।
भुक्ति मुक्ति सब तेरो काजा॥
जो जन तुमको ध्यान लगावें।
सो सात जन्म का दुख मिट जावे॥
जो पण्डित सुयोग्य बुलावे।
विधिवत पूजा मन्त्र चलावे॥
तिल तेल उड़द चढ़ावे जेई।
सो भक्त सदा सुखी रहे तेई॥
पिपरा मूल सरसों तेला।
शनि देव शनिवार को मेला॥
शनि ग्रह के जब होय बड़ाई।
तब दशरथ ने की विनवाई॥
राजा विक्रमादित्य सताये।
शनि की महिमा जग में गाये॥
हरिश्चन्द्र पर शनि भारी।
तब प्रभु राजा त्यागे नारी॥
कर्ण शनि ग्रसे अपना।
भयो युद्ध में रणछोड़ सपना॥
रावण ऊपर शनि जब आये।
लंका राज विभीषण पाये॥
पाण्डव ऊपर शनि जब छाये।
बन बन भटकत कष्ट उठाये॥
शनि वचन सत्य ना टारे।
हरि हर ब्रह्मा सब ही हारे॥
जो जन शनिवार व्रत करई।
भक्तिभाव से शनि को भजई॥
काल दोष रवि नन्दन हारे।
ग्रह बाधा नश मंगल द्वारे॥
शनि चालीसा जो नर गावे।
घर बैठे नर मनवांछित फल पावे॥
कर जोरि विनय करे जो कोई।
शनि दोष तासु निकट न होई॥
तुलसीदास सदा शनि चेरा।
कीजै नाथ हृदय महँ डेरा॥
॥ दोहा ॥
पाठ शनि चालीसा को, भक्त करें धर ध्यान।
कष्ट मिटे सब जन के, होत सदा कल्यान॥
॥ इति श्री शनि चालीसा सम्पूर्ण ॥
Benefits (फल)
- ★Removes the malefic effects of Shani Sade Sati and Shani Dhaiya
- ★Protects from planetary afflictions of Saturn
- ★Removes obstacles and suffering caused by karmic debts
- ★Bestows prosperity and removes poverty
- ★Grants fulfillment of desires when recited on Saturdays
- ★Protects from untimely death and accidents
