Shrinathji Chalisa
श्रीनाथजी चालीसा
About Shrinathji Chalisa
Dedicated to Lord Krishna, the Shrinathji Chalisa (श्रीनाथजी चालीसा) is a sacred 40-verse devotional hymn revered in Hindu tradition. Rooted in Nathdwara / Pushti Marga Tradition, this composition carries deep spiritual significance. Chanting this stotra with devotion is said to daily recitation brings unfailing blessings as well as cure diseases and remove suffering. Additionally, it is known to remove poverty and bestow wealth and prosperity. Recitation is particularly auspicious on Wednesday (Budhvar) and Sunday (Ravivar) and during Janmashtami, Annakut, and Holi. Comprising 40 verses, it can be completed in approximately 12 minutes, making it suitable for daily devotional practice. On this page, you can read the complete Shrinathji Chalisa in Devanagari Sanskrit with English transliteration, Hindi meaning (arth), and free PDF download for offline recitation.
Reviewed & translated by Acharya Pushyadant Mishra
Stotra Path (स्तोत्र पाठ)
॥ श्री श्रीनाथजी चालीसा ॥
(नाथद्वारा परम्परा)
॥ दोहा ॥
श्री श्रीनाथजी के चरण सुमिरन कर मन लाय।
सब सुख सम्पत्ति मिले दुख दरिद्र नसि जाय॥
॥ चौपाई ॥
जय श्रीनाथ गोवर्धनधारी।
जय जय कृष्ण मुरारि बिहारी॥ १॥
नाथद्वारा में करत निवास।
भक्तन के पूरत सब आस॥ २॥
शुद्ध सुवर्ण मुकुट शिर साजे।
हीरा मोती कुण्डल विराजे॥ ३॥
पीताम्बर शोभा अतिसारी।
वनमाला गले अति प्यारी॥ ४॥
बाँके बिहारी छबि निहारी।
मोहे सबही जग नर नारी॥ ५॥
माखन मिश्री भोग लगावें।
श्रीनाथ प्रभु मन ललचावें॥ ६॥
गोवर्धन गिरि एक उँगरिया।
धरि लीन्हो कृष्ण गिरधरिया॥ ७॥
इन्द्र की आँधी मेह बरसाने।
गोकुल जन सब राखे गोपाल ने॥ ८॥
पुष्टिमार्ग के आदि प्रवर्तक।
वल्लभ प्रभु के प्रिय अवतारक॥ ९॥
श्री महाप्रभु वल्लभ आये।
शुद्ध अद्वैत मत प्रचलाये॥ १०॥
सेवा मार्ग बतायो जग में।
प्रभु के दर्शन सुख सदा भजन में॥ ११॥
श्रीनाथ प्रभु छबि अनुपम भारी।
मनमोहन मुख चन्द्र उजारी॥ १२॥
चतुर्भुज रूप धरे गोपाल।
शंख चक्र गदा पद्म विशाल॥ १३॥
रास रचाये ब्रज में आई।
गोपी जन मन हरे सुहाई॥ १४॥
मथुरा काशी द्वारका धाम।
सब तीरथन में प्रभु तेरो नाम॥ १५॥
गोपी चन्दन तिलक लगावें।
तुलसी माला गले सजावें॥ १६॥
आरती करें प्रभु मंगलकारी।
झाँकी दर्शन सब सुखकारी॥ १७॥
धूप दीप नैवेद्य चढ़ावें।
श्रीनाथ प्रभु प्रसन्न हो जावें॥ १८॥
राजभोग अन्नकूट सजायें।
छप्पन भोग प्रभू को लगायें॥ १९॥
श्रावण भादों तीज त्यौहार।
नाथद्वारा सजत अपार॥ २०॥
दीपावली दीप जलत अनन्त।
आनन्द मनावत भक्त अनन्त॥ २१॥
होली रंग गुलाल उड़ावें।
प्रभु के संग फाग सुख पावें॥ २२॥
अन्नकूट महोत्सव भारी।
छप्पन भोग लगें अतिसारी॥ २३॥
जनमाष्टमी आनन्द मनावें।
श्रीनाथ प्रभु के गुण गावें॥ २४॥
डोल उत्सव जल झूलत प्यारे।
मन मोहत जन जन उजियारे॥ २५॥
सुबोधिनी ग्रन्थ विचारें।
भागवत कथा सुनें सम्भारें॥ २६॥
भक्तिमार्ग जग में प्रकटाये।
वैष्णव जन हित प्रभु आये॥ २७॥
सात स्वरूप प्रभु के प्यारे।
सातों रूप भक्तन हितकारे॥ २८॥
श्रीनाथ प्रभु की जय जयकार।
भक्तन के सब काज सँवार॥ २९॥
दर्शन मात्र पापन को हारे।
मन की मुरादें सब पूरे प्यारे॥ ३०॥
धन सम्पत्ति सुख समृद्धि दाता।
सब जग में प्रभु विख्यात विधाता॥ ३१॥
रोगी होवे स्वस्थ सुखकारी।
निर्धन होवे धनवान भारी॥ ३२॥
सन्तान सुख दें श्रीनाथ प्रभु।
भक्तन की सब इच्छा पूरी हो सभू॥ ३३॥
सन्कट हरें विपद निवारें।
भक्त जनों को सदा सम्भारें॥ ३४॥
विद्या बुद्धि ज्ञान प्रदाता।
श्रीनाथ प्रभु सब जग के त्राता॥ ३५॥
पुष्टि भक्ति रसमय जीवन।
प्रभु सेवा मधुर पावन॥ ३६॥
ब्रज में बसे विराज बिहारी।
नाथद्वारा है सेवा न्यारी॥ ३७॥
यमुनाजी तट शोभा भारी।
प्रभु की कृपा अनन्त अपारी॥ ३८॥
गो सेवा सम धर्म न कोई।
श्रीनाथ प्रभु वचन सुन सोई॥ ३९॥
जो नित नियम चालीसा गावे।
सकल मनोरथ सिद्ध करावे॥ ४०॥
॥ दोहा ॥
श्रीनाथजी चालीसा जो कोई गावे नित्य।
सब सुख सम्पत्ति लहे भक्ति होय अविचल सत्य॥
॥ इति श्री श्रीनाथजी चालीसा सम्पूर्ण ॥
Benefits (फल)
- ★Grants the darshan-equivalent merit of Shrinathji Nathdwara
- ★Removes poverty and bestows wealth and prosperity
- ★Fulfills all desires of devotees
- ★Cures diseases and removes suffering
- ★Grants children and family happiness
- ★Bestows Pushti Bhakti (devotion of divine grace)
- ★Daily recitation brings unfailing blessings
