Vishnu Chalisa
विष्णु चालीसा
About Vishnu Chalisa
Vishnu Chalisa (विष्णु चालीसा) is a sacred 40-verse devotional hymn dedicated to Lord Vishnu. Drawn from Traditional Vishnu Devotional Literature, this text has been cherished by devotees for centuries. Chanting this stotra with devotion is said to protect devotees from all dangers and enemies as well as remove all sorrows and difficulties from life. Additionally, it is known to grant children and family happiness. Recitation is particularly auspicious on Thursday (Guruvar) and Sunday (Ravivar) and during Ekadashi. Comprising 42 verses, it can be completed in approximately 15 minutes, making it suitable for daily devotional practice. On this page, you can read the complete Vishnu Chalisa in Devanagari Sanskrit with English transliteration, Hindi meaning (arth), and free PDF download for offline recitation.
Reviewed & translated by Acharya Pushyadant Mishra
Stotra Path (स्तोत्र पाठ)
॥ श्री विष्णु चालीसा ॥
॥ दोहा ॥
विष्णु पदामृत रस पान, करत सकल गुण धाम।
सकल सुमंगल मोद मय, दायक प्रभु अभिराम॥
नमो विष्णु भगवान को, जो रचि सकल जहान।
पालन करत सबहि प्रभु, सकल लोक विधान॥
॥ चौपाई ॥
जय जय विष्णु जगत आधारा।
जय नारायण जग उजियारा॥
शेषशायी जग के स्वामी।
सब जग पालक अन्तर्यामी॥
चार भुज तन शोभित छवि।
शंख चक्र गदा पद्म अवि॥
पीताम्बर तन कान्ति अपारा।
वनमाला शोभित उर हारा॥
कौस्तुभ मणि उर शोभित भारी।
मुकुट कुण्डल छवि अति प्यारी॥
मकराकृत कुण्डल अति सोहे।
श्री वत्स उर मन को मोहे॥
शेषनाग शयन सुखकारी।
क्षीर सागर रहत मुरारी॥
लक्ष्मी जी नित चरन दबावें।
सुर मुनि जन दर्शन को आवें॥
ब्रह्मा जी नाभि कमल जनमे।
रचत जगत सब विधि अनुगमे॥
मत्स्य कूर्म वराह नरसिंहा।
वामन रूप कीन्हि बहु महिमा॥
परशुराम बनि क्षत्रिन मारे।
राम बनि रावण संहारे॥
कृष्ण बनि कंस को मारा।
बुद्ध रूप जग को उपकारा॥
कल्कि रूप धरहु जब राजा।
सकल दुष्ट तब होहिं निवाजा॥
नीलवर्ण शोभित तन सारा।
दिव्य अलौकिक रूप तुम्हारा॥
जब जब होय धर्म की हानी।
तब तब तुम रक्षक भगवानी॥
असुर निकंदन करत सदाई।
सन्त जनन को देत बड़ाई॥
प्रह्लाद बचाय नरसिंह बने।
हिरण्यकश्यपु मारेहु छने॥
ध्रुव को वरदान तुम दीन्हा।
अटल पद उसको तुम कीन्हा॥
गज ग्राह से तुम बचाये।
भक्त विभीषण शरण में आये॥
द्रौपदी की लाज बचायी।
चीर बढ़ाय महिमा दिखलायी॥
सुदामा की विपदा तुम टारी।
मित्र प्रेम से कृपा विस्तारी॥
भक्त वत्सल तुम दयालू।
शरणागत के तुम प्रतिपालू॥
गोवर्धन गिरि धारण कीन्हा।
गोप ग्वाल सबको सुख दीन्हा॥
मथुरा काशी द्वारिका धामा।
जहँ जहँ होत तुम्हारा नामा॥
जगन्नाथ तुम तिरुपति वासी।
बद्री केदार तुम अविनाशी॥
रामेश्वरम तुम राम कहाये।
विश्व में मंगल सुख बरसाये॥
वेद पुराण तुम्हारा गुण गावें।
ब्रह्मा शंकर शीश नवावें॥
सनकादिक नारद मुनि ध्यावें।
शेष सहस गुण कहि न पावें॥
हनुमत शेष धरत तव पाई।
गरुड़ वाहन करत सवाई॥
कृपा करहु प्रभु जन सेवक पर।
पतित पावन तारण नाथ हर॥
जो कोई चालीसा पढ़ पावे।
विष्णु कृपा नित नित सो पावे॥
सकल मनोरथ पूरन होई।
दुख दारिद्र रहे नहि कोई॥
सुन्दरदास धरे जो ध्याना।
विष्णु भगत पावे कल्यानाा॥
करि विनती अब जोरि कर।
चरन शरण सुख पाऊँ प्रभु पर॥
॥ दोहा ॥
विष्णु चालीसा पढ़ें जो, नित नर नारी प्रात।
सन्तति सम्पत्ति सुख मिले, करे विष्णु साक्षात॥
Benefits (फल)
- ★Bestows the divine grace of Lord Vishnu
- ★Brings prosperity, wealth, and happiness
- ★Removes all sorrows and difficulties from life
- ★Protects devotees from all dangers and enemies
- ★Grants children and family happiness
- ★Fulfills all desires when recited daily with devotion
