Durga Sahasranama Stotram (Skanda Purana)
दुर्गा सहस्रनाम स्तोत्रम्
About Durga Sahasranama Stotram (Skanda Purana)
Durga Sahasranama Stotram — दुर्गा सहस्रनाम स्तोत्रम् — is a sacred recitation of 1000 divine names offered to Goddess Durga. This revered text originates from Markandeya Purana. Regular recitation is believed to grant long life, health, and all prosperity, destroy all enemies when recited at three sandhyas, and destroy all sins and grant liberation (Param Brahma). Recitation is particularly auspicious on Friday (Shukravar) and Tuesday (Mangalvar) and during Navratri, Durga Puja, and Chaitra Navratri. At 30 verses long, the recitation takes roughly 25 minutes, making it accessible for regular devotional use. On this page, you can read the complete Durga Sahasranama Stotram in Devanagari Sanskrit with English transliteration, Hindi meaning (arth), and free PDF download for offline recitation.
Reviewed & translated by Acharya Pushyadant Mishra
Stotra Path (स्तोत्र पाठ)
॥ श्री दुर्गा सहस्रनाम स्तोत्रम् ॥
॥ विनियोगः ॥
ॐ अस्य श्रीदुर्गासहस्रनामस्तोत्रमन्त्रस्य नारायण ऋषिः।
अनुष्टुप् छन्दः। श्रीमहादुर्गा देवता।
ह्रीं बीजम्। श्रीं शक्तिः।
दुं कीलकम्। श्रीदुर्गाप्रीत्यर्थे सहस्रनामजपे विनियोगः॥
॥ ध्यानम् ॥
सिंहस्थां शशिशेखरां मरकतप्रख्यैश्चतुर्भिर्भुजैः
शङ्खं चक्रधनुः शरांश्च दधतीं नेत्रैस्त्रिभिः शोभिताम्।
आमुक्ताङ्गदहारकुण्डलधरां पूर्णेन्दुवक्त्राम्बुजां
दुर्गां देवीमनन्तरूपनमिताम् ध्यायेत् त्रिलोकेश्वरीम्॥
॥ स्तोत्रम् ॥
ॐ शिवा भवानी रुद्राणी शर्वाणी सर्वमङ्गला।
अपर्णा पार्वती दुर्गा महादुर्गा प्रचण्डिका॥ १॥
चण्डिका चण्डमथनी चण्डदर्पविनाशिनी।
महामाया सुदुर्ज्ञेया सत्या सर्वस्वरूपिणी॥ २॥
सर्वेश्वरी सर्ववन्द्या सर्वलोकनमस्कृता।
सर्वस्य हृदयं लक्ष्मीः पद्मा सम्पत्करी शुभा॥ ३॥
उमा कात्यायनी गौरी काली हैमवती शिवा।
दाक्षायणी सती चैव भद्रकाली सदाशिवा॥ ४॥
विजया वैष्णवी दुर्गा कुमारी सिंहवाहिनी।
महालक्ष्मी र्महाकाली महासरस्वती तथा॥ ५॥
त्रिशक्तिः परमा शक्तिरादिशक्तिरनन्तजा।
नित्या सत्यानवद्याङ्गी सर्वज्ञा शास्त्रयोनिजा॥ ६॥
चिदानन्दमयी चिन्मयी परमात्मिका।
आनन्दा चिन्मयानन्दा विश्वसूतिः प्रकाशिनी॥ ७॥
महीश्वरी महादेवी महालक्ष्मी र्मनोन्मनी।
महाविद्या महामेधा महामोहा महासुखा॥ ८॥
नारायणी भगवती विरूपाक्षी विशालाक्षी।
त्रिलोचना विश्वमाता जगद्धात्री सरस्वती॥ ९॥
गायत्री सावित्री प्राज्ञा पराशक्तिः परापरा।
प्राणेश्वरी प्राणदात्री प्राणिनां हितकारिणी॥ १०॥
नगात्मजा नगवासा नगरूपा नगेश्वरी।
नागकन्या नागमाता नागराजसुपूजिता॥ ११॥
पद्मावती पद्ममुखी पद्मनाभसहोदरी।
पुण्यगन्धा पुण्यदेहा पुण्यशीला पतिव्रता॥ १२॥
विद्याधरी विशालाक्षी विमलोत्कर्षदायिनी।
वेदान्तज्ञानिनी योगा योगमाता च योगिनी॥ १३॥
मङ्गला मङ्गलाचारा मनोहरा मनस्विनी।
महामन्त्रमयी मातृ मालिनी मन्त्रनायिका॥ १४॥
ब्रह्माणी वैष्णवी रौद्री कौमारी वाराही तथा।
इन्द्राणी चामुण्डा चैव चण्डघण्टा तिलोत्तमा॥ १५॥
महागौरी शैलपुत्री ब्रह्मचारिणी सत्यवती।
कूष्माण्डा स्कन्दमाता च कालरात्रिर्महाबला॥ १६॥
सिद्धिदात्री सिद्धिरूपा सिद्धविद्या यशस्विनी।
सिद्धेश्वरी सिद्धमाता सिद्धसाध्यप्रपूजिता॥ १७॥
दशभुजा विंशतिभुजा सहस्रभुजशोभिता।
अष्टादशभुजा देवी षोडशी बालसुन्दरी॥ १८॥
खड्गहस्ता शूलहस्ता गदाहस्ता धनुर्धरा।
चक्रधारी शङ्खधारी पाशधारी सुनागिनी॥ १९॥
दमनी दानवध्वंसी दर्पघ्नी दैत्यनाशिनी।
दुर्धरा दुर्गमा देवी दुष्टदैत्यनिबर्हिणी॥ २०॥
देवप्रिया देवमाता देवेश्वरी देवपूजिता।
धर्मधारा धर्मनिष्ठा धर्मकामार्थमोक्षदा॥ २१॥
रणप्रिया रणोद्दामा रक्तबीजनिबर्हिणी।
रक्तदन्ता रक्तमुखी रक्तवस्त्रा भयङ्करी॥ २२॥
सृष्टिकर्त्री जगन्माता स्थितिसंहारकारिणी।
प्रलयङ्करी दुर्ज्ञेया नित्या शाश्वतशक्तिका॥ २३॥
भूमिरापस्तथा तेजो वायुराकाशमेव च।
गन्धः स्पर्शश्च रूपं च रसः शब्दश्च सा पराम्॥ २४॥
अग्निमण्डलमध्यस्था चन्द्रमण्डलवासिनी।
सूर्यमण्डलसंस्थाना ग्रहनक्षत्ररूपिणी॥ २५॥
कुण्डलिनी योगनिद्रा महायोगेश्वरेश्वरी।
ज्वालामुखी वह्निरूपा कमलासनवासिनी॥ २६॥
रत्नगर्भा रत्नमाला रत्नसागरमेखला।
कामरूपा कामदात्री कामेश्वरी मनोरमा॥ २७॥
सर्वशक्त्यासनारूढा धर्माधर्मविवर्जिता।
वैकुण्ठवासिनी देवी ब्रह्मलोकनिवासिनी॥ २८॥
मुक्तकेशी दीर्घकेशी सर्पकेशी भयानका।
अमृतेश्वरी सर्वाद्या जगतामादिरीश्वरी॥ २९॥
गिरिजा गिरिशा गम्या गिरिकन्या गुहेश्वरी।
गणेशमाता गणपा गणनाथसुपूजिता॥ ३०॥
॥ फलश्रुति ॥
दुर्गानामसहस्रं तु यो नरः प्रपठेत् सदा।
सर्वपापविनिर्मुक्तः परं ब्रह्माधिगच्छति॥
त्रिसन्ध्यं यः पठेन्नित्यं सर्वशत्रुविनाशनम्।
सर्वव्याधिप्रशमनं सर्वदुःखनिवारणम्॥
पुत्रपौत्रप्रदं चैव विद्यालाभकरं शुभम्।
आयुरारोग्यदं चैव सर्वसम्पत्करं परम्॥
॥ इति श्री मार्कण्डेयपुराणान्तर्गते श्री दुर्गा सहस्रनाम स्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥
Benefits (फल)
- ★Contains the thousand divine names of Goddess Durga
- ★Destroys all sins and grants liberation (Param Brahma)
- ★Destroys all enemies when recited at three sandhyas
- ★Cures all diseases and removes all sorrows
- ★Bestows children, grandchildren, education, and wealth
- ★Grants long life, health, and all prosperity
- ★Includes the nine Durga forms (Navadurga) and Matrika names
