Ganesh Chaturthi Vrat Katha
गणेश चतुर्थी व्रत कथा
About Ganesh Chaturthi Vrat Katha
Ganesh Chaturthi Vrat Katha (गणेश चतुर्थी व्रत कथा) is a sacred prayer dedicated to Lord Ganesha. This revered text originates from Ganesha Purana. It narrates the story of how Chandra (Moon) mocked Ganesha and received a curse — whoever sees the moon on Chaturthi faces false accusations. The curse affected Lord Krishna in the Syamantaka Mani incident. Ganesha later modified the curse: worship him on Chaturthi to be freed. Chanting this katha with devotion removes all obstacles, protects from false accusations, and bestows wisdom and prosperity. Recitation is particularly auspicious on Wednesday and during Ganesh Chaturthi and Sankashti Chaturthi. Comprising 18 verses with a reading time of about 12 minutes, this katha is ideal for festival observance and daily worship. On this page, you can read the complete Ganesh Chaturthi Vrat Katha in Devanagari Sanskrit with English transliteration, Hindi meaning (arth), and free PDF download for offline recitation.
Reviewed & translated by Acharya Pushyadant Mishra
Stotra Path (स्तोत्र पाठ)
॥ श्री गणेश चतुर्थी व्रत कथा ॥
ॐ श्री गणेशाय नमः।
॥ गणेश चतुर्थी माहात्म्य ॥
भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को गणेश चतुर्थी का पावन पर्व मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्री गणेश की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस व्रत की कथा गणेश पुराण में वर्णित है।
॥ कथा प्रारम्भ — चन्द्रमा का अभिमान ॥
एक समय की बात है। भगवान गणेश अपने भक्तों के घर से लौट रहे थे। उस दिन चतुर्थी तिथि थी। भक्तों ने बड़े प्रेम से गणेशजी को भोग लगाया था — मोदक, लड्डू, खीर और अनेक पकवान। गणेशजी ने बड़े आनन्द से सब ग्रहण किया। उनका पेट भरा हुआ था, तृप्ति से उनका मुख प्रसन्न था।
रात्रि को गणेशजी अपने वाहन मूषक पर सवार होकर कैलास लौट रहे थे। मार्ग में एक सर्प अचानक सामने आ गया। मूषक भयभीत होकर एकदम रुक गया और गणेशजी नीचे गिर पड़े। उनके पेट से सारे मोदक बाहर निकल आये। गणेशजी ने जल्दी से सारे मोदक उठाकर फिर से खा लिये, पेट बाँधने के लिये उस सर्प को ही कमरबन्द बना लिया और पुनः मूषक पर सवार हो गये।
यह दृश्य आकाश से चन्द्रमा देख रहा था। चन्द्रमा को अपने रूप और सौन्दर्य पर बड़ा अभिमान था। गणेशजी के मोटे पेट और मूषक से गिरने पर चन्द्रमा जोर-जोर से हँसने लगा। उसने कहा — "देखो-देखो! यह मोटे पेट वाले कैसे मूषक पर चढ़कर गिर पड़े! और सर्प को कमरबन्द बनाकर बाँध रहे हैं!"
चन्द्रमा का यह उपहास सुनकर गणेशजी को बड़ा क्रोध आया। उन्होंने चन्द्रमा को शाप दिया — "हे चन्द्र! तुमने मेरा उपहास किया है। आज से जो कोई भी चतुर्थी तिथि को तुम्हारे दर्शन करेगा, उस पर मिथ्या कलंक लगेगा। उसे झूठा आरोप सहना पड़ेगा।"
चन्द्रमा भयभीत हो गया। उसकी कान्ति क्षीण हो गई। देवताओं ने गणेशजी से प्रार्थना की, किन्तु शाप वापस नहीं हो सकता था।
॥ श्रीकृष्ण पर शाप का प्रभाव — स्यमन्तक मणि प्रकरण ॥
द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी की रात्रि को आकाश में चन्द्रमा देख लिया। इसके बाद सत्राजित की बहुमूल्य स्यमन्तक मणि खो गई। सत्राजित ने श्रीकृष्ण पर मणि चुराने का मिथ्या आरोप लगा दिया। श्रीकृष्ण को बड़ा दुःख हुआ। उन्होंने मणि की खोज की — जामवन्त के पास मणि मिली। भीषण युद्ध के बाद जामवन्त ने मणि लौटाई और अपनी पुत्री जामवन्ती का विवाह श्रीकृष्ण से किया। तब सत्राजित को अपनी भूल का अनुभव हुआ।
नारद मुनि ने बताया कि यह सब गणेश के शाप के कारण हुआ — चतुर्थी को चन्द्रमा देखने का फल है।
॥ शाप का उपाय ॥
तब श्रीकृष्ण ने गणेशजी की आराधना की। गणेशजी ने प्रसन्न होकर शाप में संशोधन किया — "जो मनुष्य भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को मेरा व्रत करेगा, मेरी पूजा करेगा और यह कथा सुनेगा, उस पर मिथ्या कलंक नहीं लगेगा। शाप से मुक्ति मिलेगी।"
तभी से भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन चन्द्रमा के दर्शन वर्जित हैं।
॥ व्रत विधि ॥
भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को प्रातः स्नान करके गणेशजी की मूर्ति स्थापित करें।
षोडशोपचार पूजा करें — चन्दन, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य अर्पित करें।
२१ मोदक और दूर्वा घास अर्पित करें।
गणेश चतुर्थी व्रत कथा का श्रवण करें।
इस दिन चन्द्रमा के दर्शन न करें।
दस दिन पूजा के बाद अनन्त चतुर्दशी को गणेश विसर्जन करें।
॥ मन्त्र ॥
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफलचारुभक्षणम्।
उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम्॥
॥ इति श्री गणेश चतुर्थी व्रत कथा सम्पूर्ण ॥
Benefits (फल)
- ★Complete Ganesh Chaturthi vrat katha with Chandra shrap and Syamantaka Mani episode
- ★Protects from false accusations and defamation (mithya kalank nivaran)
- ★Removes all obstacles and grants success in every endeavor
- ★Bestows wisdom, prosperity, and Ganesha's divine blessings
- ★Essential katha for Ganesh Chaturthi and Sankashti Chaturthi observance
- ★Includes powerful Ganesh mantras for daily recitation
