Gayatri Chalisa
गायत्री चालीसा
About Gayatri Chalisa
Among the most cherished prayers to Goddess Gayatri, Gayatri Chalisa (गायत्री चालीसा) stands as a sacred 40-verse devotional hymn. Rooted in Traditional Chalisa Sangrah, this composition carries deep spiritual significance. Regular recitation is believed to enhance intellect, wisdom, and spiritual knowledge, bestow Brahma Tejas (divine radiance) on the devotee, and remove sins and negative karma accumulated over lifetimes. This prayer is traditionally recited on Sunday (Ravivar) and Thursday (Guruvar) and during Gayatri Jayanti to invoke divine grace. Comprising 42 verses, it can be completed in approximately 15 minutes, making it suitable for daily devotional practice. On this page, you can read the complete Gayatri Chalisa in Devanagari Sanskrit with English transliteration, Hindi meaning (arth), and free PDF download for offline recitation.
Reviewed & translated by Acharya Pushyadant Mishra
Stotra Path (स्तोत्र पाठ)
॥ दोहा ॥
जय गायत्री माता जय, वेद माता परम ज्ञान।
चालीसा तव गाइये, करहु कृपा भगवान॥
हृदय कमल में बैठि के, करो सकल कल्यान।
गायत्री माता तिहारो, कहूँ चालीसा गान॥
॥ चौपाई ॥
जय जय जय गायत्री माता।
तुम हो वेदों की विधाता॥
ब्रह्मा जी की शक्ति पुकारी।
तुम हो सृष्टि की अधिकारी॥
सावित्री सन्ध्या रूप तिहारा।
तीनों सन्ध्या ध्यान तिहारा॥
प्रातः काल ब्रह्मरूप ध्यावें।
मध्याह्न में वैष्णवी पावें॥
सायं काल शिवानी कहावें।
त्रिकाल सन्ध्या सब सुख पावें॥
चौबीस अक्षर मंत्र तिहारा।
सब मन्त्रन में श्रेष्ठ अपारा॥
ॐ भूर्भुवः स्वः ततः सवितुः।
वरेण्यम् भर्गो देवस्य धीमहि॥
धियो यो नः प्रचोदयात्।
यही मंत्र सबसे परम ज्ञात॥
तीन लोक में शक्ति तिहारी।
तुम हो सकल विद्या अधिकारी॥
विश्वामित्र ने मंत्र दिया।
त्रिलोक में प्रकाश किया॥
द्विज मात्र को उपनयन संस्कार।
गायत्री मंत्र का अधिकार॥
जो नित संध्या वन्दन करे।
सो पापन से सदा तिरे॥
सूर्य देव की शक्ति पुकारी।
सविता तेज की अधिकारी॥
बुद्धि विवेक प्रदान करावे।
अज्ञान तिमिर को दूर भगावे॥
पंच मुखी गायत्री माता।
पंच प्राण की तुम हो ज्ञाता॥
पंच तत्व से जग रचा तुमने।
पंच देवता पूजें तुमने॥
हंस वाहिनी वेद पुकारे।
कमण्डलु पुस्तक हस्त तिहारे॥
श्वेत वसन मुख चन्द्र समाना।
सकल विद्या का तुम हो खजाना॥
पुष्कर तीर्थ तुम्हारा प्यारा।
ब्रह्मा संग विराजे न्यारा॥
गायत्री शक्तिपीठ विराजे।
सकल तीर्थ में मंगल साजे॥
जो गायत्री जप नित करे।
सो ब्रह्म ज्ञान को प्राप्त करे॥
सहस्र जप मनोरथ पूरे।
लाख जप ऋद्धि सिद्धि ना दूरे॥
पंडित विद्वान गायत्री ध्यावें।
ब्रह्म तेज मुख पर छा जावे॥
रोग शोक दारिद्रय मिटावे।
गायत्री मंत्र जो नित ध्यावे॥
सन्तान सुख प्रदान करावे।
गृहस्थ जीवन सुख से भरावे॥
मोक्ष मार्ग का द्वार खुलावे।
गायत्री माता भव पार लगावे॥
चारों वेद में शक्ति तिहारी।
गायत्री तुम जगत उजियारी॥
तुम्हरे बिना न यज्ञ सिधावे।
हवन होम में तुम्हें बुलावे॥
चालीसा गायत्री गाये।
सो सब सुख सम्पत्ति पाये॥
भक्ति भाव से पाठ जो करे।
सो संसार सागर से तरे॥
गायत्री माता की जय जय जय।
करो कृपा सब जन पर सदय॥
॥ दोहा ॥
गायत्री चालीसा पढ़े, करे सन्ध्या नित ध्यान।
बुद्धि विवेक प्रकाश हो, पावे ब्रह्म ज्ञान॥
Benefits (फल)
- ★Enhances intellect, wisdom, and spiritual knowledge
- ★Purifies mind and grants clarity of thought
- ★Essential for those who perform daily Sandhya Vandana
- ★Removes sins and negative karma accumulated over lifetimes
- ★Bestows Brahma Tejas (divine radiance) on the devotee
