Krishna Chalisa
कृष्ण चालीसा
About Krishna Chalisa
Krishna Chalisa (कृष्ण चालीसा) is a sacred 40-verse devotional hymn dedicated to Lord Krishna. Rooted in Traditional, this composition carries deep spiritual significance. Devotees recite this prayer to remove all obstacles and sorrows from life and protect devotees from negative influences. It is also said to grant divine blessings of Lord Krishna. This prayer is traditionally recited on Wednesday (Budhvar) and during Janmashtami to invoke divine grace. At 42 verses long, the recitation takes roughly 15 minutes, making it accessible for regular devotional use. On this page, you can read the complete Krishna Chalisa in Devanagari Sanskrit with English transliteration, Hindi meaning (arth), and free PDF download for offline recitation.
Reviewed & translated by Acharya Pushyadant Mishra
Stotra Path (स्तोत्र पाठ)
॥ दोहा ॥
बंसी शोभित कर मधुर, नीलमणि तन श्याम।
चंद्रिका सी मंद हँसी, नन्दकिशोर ललाम॥
अर्जुन को गीता कही, देवकी के बलराम।
कृष्ण चालीसा पढ़त ही, पूरन होत सब काम॥
॥ चौपाई ॥
जय श्रीकृष्ण दयानिधि दाता।
जग के पालनहार बिधाता॥
देवकी तुम मैया के ऊधव।
यशोदा के हित की परछाईं॥
नन्द के आनन्द बढ़ावन।
गोकुल में आनन्द मचावन॥
ब्रज में धूम मचावन लीला।
सुर-नर-मुनि मन हरने खेला॥
मैया के संग माखन भावै।
चोरी कर नवनीत उड़ावै॥
ग्वालन संग गैय्या चरावै।
बंसी की धुन सब मन भावै॥
गोपियन के संग रास रचावै।
मुरली की मधुर धुन गावै॥
कालिंदी में कालिय नाथा।
छापे विषधर लिये साथा॥
गोवर्धन गिरि को उठाया।
इंद्र का मान खूब घटाया॥
मथुरा में कंस वध कीना।
उग्रसेन को राज पद दीना॥
गुरु संदीपन से विद्या पाई।
मित्र सुदामा की सुधि आई॥
द्वारिका नगरी बसाई।
रुक्मिणी संग विवाह रचाई॥
पांडवन के सखा कहाये।
अर्जुन के सारथी बन आये॥
विश्वरूप अर्जुन दिखाया।
गीता ज्ञान जगत को दाया॥
धर्म की सदा रक्षा कीनी।
दुष्टन को सब सजा दीनी॥
द्रौपदी की लाज बचाई।
अन्त विहीन चीर बढ़ाई॥
भीष्म प्रण की राखी लाजा।
धर्मराज को दीन्हो राजा॥
सोलह कला सम्पूर्ण अवतारा।
कर्म-धर्म का दीप उजारा॥
जरासन्ध को दीन्हो मारी।
शिशुपाल वध की तैयारी॥
नरकासुर का नाश कराया।
सोलह सहस कन्या को लाया॥
गोपी गोपन को सुख दीना।
भक्तन पर सदा कृपा कीना॥
मीरा थी दीवानी तोरी।
सूरदास की आँख न मोरी॥
नरसी का कष्ट निवारा।
भक्तन को सदा प्यारा॥
मोर मुकुट पीतांबर धारी।
कुण्डल श्रवण मनोहर भारी॥
वैजयन्ती माल विराजे।
नयनन में अंजन साजे॥
मुरली अधर मधुर मुस्कान।
सकल सृष्टि के तुम भगवान॥
कृष्ण चालीसा जो गावै।
बैकुण्ठ परमपद पावै॥
जो कोई शुद्ध भाव से पढ़ई।
तन-मन-धन की विपदा कटई॥
॥ दोहा ॥
श्रीकृष्ण चालीसा नित, पढ़ै जो कोई धाम।
ताको सब सुख सम्पदा, मिलै कृष्ण अविराम॥
Benefits (फल)
- ★Grants divine blessings of Lord Krishna
- ★Removes all obstacles and sorrows from life
- ★Bestows peace, prosperity, and happiness
- ★Helps attain spiritual growth and devotion
- ★Protects devotees from negative influences
- ★Fulfills righteous desires when recited with faith
