Parvati Chalisa
पार्वती चालीसा
About Parvati Chalisa
Dedicated to Goddess Parvati, the Parvati Chalisa (पार्वती चालीसा) is a sacred 40-verse devotional hymn revered in Hindu tradition. Rooted in Traditional Chalisa Sangrah, this composition carries deep spiritual significance. Chanting this stotra with devotion is said to bless married women with eternal saubhagya (marital bliss) as well as invoke the divine mother's protection for the household. Additionally, it is known to bestow happy family life and progeny. It is especially recommended on Monday (Somvar) and Friday (Shukravar) and during Navratri, Karva Chauth, and Hartalika Teej for maximum spiritual benefit. At 42 verses long, the recitation takes roughly 15 minutes, making it accessible for regular devotional use. On this page, you can read the complete Parvati Chalisa in Devanagari Sanskrit with English transliteration, Hindi meaning (arth), and free PDF download for offline recitation.
Reviewed & translated by Acharya Pushyadant Mishra
Stotra Path (स्तोत्र पाठ)
॥ दोहा ॥
माता पार्वती चरन रज, शिर पर धरत प्रणाम।
चालीसा माता तिहारो, कहूँ करत अभिराम॥
हिमवन सुता शिवप्रिया, गिरिजा अम्ब पुकार।
करो कृपा दासन पर, हरो सकल संसार॥
॥ चौपाई ॥
जय पार्वती माता शिवरानी।
जय शैलसुता जगत कल्याणी॥
हिमवन्त के घर अवतारी।
मेना माता सुत सुखकारी॥
बालपन से शिव को ध्यावा।
तप करि शिव शंकर को पावा॥
नारद मुनि ने बात बताई।
शिव वर पाओगी सुखदाई॥
कठोर तप किया हिमालय माहीं।
जाड़ गरमी बरखा सब साहीं॥
पंच अग्नि तप किया कठोरा।
शिव मन मोह लिया बड़ जोरा॥
सप्तर्षि आये परखन आये।
पार्वती ने शिव ब्रत बतलाये॥
शिव शंकर ने वर दीन्हा।
पार्वती ने शिव को वरे लीन्हा॥
गणेश कार्तिकेय माता बनी।
सकल जगत की माँ सुखदानी॥
अन्नपूर्णा रूप तिहारा।
सकल जगत को अन्न अधारा॥
गौरी रूप से जग सोहे।
शिव संग बैठी मन को मोहे॥
काली रूप धरा जब माता।
महिषासुर दैत्य विनाशक ज्ञाता॥
दस भुजा में शस्त्र विराजे।
दुर्गा रूप में दुष्ट विनाशे॥
नवरात्र में पूजा होवे।
मात पार्वती दर्शन जोवे॥
सिंह वाहिनी अम्ब पुकारी।
भक्तन के सब कष्ट निवारी॥
कामाख्या देवी रूप सुहाना।
शक्तिपीठ सब जग में जाना॥
इक्यावन शक्तिपीठ तिहारे।
जहाँ जहाँ अंग गिरे सुखकारे॥
सती रूप में प्राण त्यागे।
दक्ष यज्ञ में अग्नि में जागे॥
शिव ने तांडव कठोर मचाया।
विष्णु ने सुदर्शन चक्र चलाया॥
शक्ति स्वरूपा जगदम्बा तू ही।
ब्रह्माणी रुद्राणी कही सबही॥
लक्ष्मी सरस्वती तव अवतारा।
नव दुर्गा में रूप तिहारा॥
सबके दुख दरिद्र निवारो।
माता पार्वती सब सुख सारो॥
जो जन ध्यान तुम्हारा ध्यावे।
सो सब सुख सम्पदा पावे॥
गृहस्थ जीवन सुखमय होवे।
सन्तान सुख की वर्षा होवे॥
सौभाग्य बढ़े सब दिन माता।
पार्वती पूजन सुखदाता॥
सुहागन स्त्री पूजा करें।
पार्वती कृपा से सुख भरें॥
करवा चौथ हरतालिका पूजें।
मात पार्वती मन न दूजें॥
मंगल गौरी व्रत जो करे।
सब सुख पावे कष्ट सब टरे॥
शिव पार्वती सदा सुखदानी।
जगत जननी कल्याणकारी रानी॥
चालीसा माता को गावे।
सो सब विपद विनाश करावे॥
नित पाठ करे भक्ति भाव से।
सो परम पद पावे प्रभाव से॥
॥ दोहा ॥
पार्वती चालीसा पढ़े, जो कोई नर नारि।
शिव कृपा सदा प्राप्त हो, मिटे कष्ट सब भारि॥
Benefits (फल)
- ★Blesses married women with eternal saubhagya (marital bliss)
- ★Grants strength and determination like Parvati's tapasya
- ★Bestows happy family life and progeny
- ★Invokes the divine mother's protection for the household
- ★Recommended for Karva Chauth and Hartalika Teej puja
