Shree Rama — the seventh avatar of VishnuShree Ramasunday

Ram Navami Vrat Katha

राम नवमी व्रत कथा

12 min read16 versesSource: Valmiki Ramayana

About Ram Navami Vrat Katha

Ram Navami Vrat Katha (राम नवमी व्रत कथा) is a sacred prayer dedicated to Lord Rama. This revered text originates from the Valmiki Ramayana. Reciting this katha with devotion invokes Lord Rama's blessings for dharma, grants peace and prosperity, and bestows courage to follow the path of duty. Recitation is particularly auspicious on Sunday (Ravivar) and during Ram Navami and Chaitra Navratri. Comprising 16 verses, it can be completed in approximately 12 minutes, making it ideal for festival day worship. On this page, you can read the complete Ram Navami Vrat Katha in Devanagari Sanskrit with English transliteration, Hindi meaning (arth), and free PDF download for offline recitation.

Reviewed & translated by Acharya Pushyadant Mishra

Stotra Path (स्तोत्र पाठ)

॥ श्री राम नवमी व्रत कथा ॥

ॐ श्री रामाय नमः।

॥ कथा ॥

त्रेतायुग की बात है। अयोध्या नगरी में सूर्यवंशी चक्रवर्ती सम्राट दशरथ राज्य करते थे। उनकी तीन रानियाँ थीं — कौशल्या, सुमित्रा और कैकेयी। राजा दशरथ धर्मात्मा, प्रजावत्सल और परम प्रतापी थे, किन्तु एक महान दुःख था उनके हृदय में — उनकी कोई सन्तान नहीं थी।

वर्षों बीत गए। राजा दशरथ ने अनेक यज्ञ किए, अनेक व्रत-तप किए, किन्तु पुत्र-प्राप्ति का सौभाग्य नहीं मिला। अन्त में उन्होंने अपने कुलगुरु वशिष्ठ मुनि से परामर्श किया।

गुरु वशिष्ठ ने कहा — "हे राजन! आप महर्षि ऋष्यशृंग को बुलाएँ। वे पुत्रेष्टि यज्ञ करा सकते हैं जिससे आपको पुत्र-रत्न की प्राप्ति होगी।"

महर्षि ऋष्यशृंग को ससम्मान अयोध्या बुलाया गया। सरयू नदी के तट पर विशाल यज्ञशाला का निर्माण हुआ। अनेक ऋषि-मुनि, विद्वान और देवता आमन्त्रित किए गए। पुत्रेष्टि यज्ञ का शुभारम्भ हुआ।

महर्षि ऋष्यशृंग ने वेदमन्त्रों के उच्चारण के साथ यज्ञ की अग्नि प्रज्वलित की। घी, समिधा और औषधियों से आहुतियाँ दी गईं। यज्ञ की अग्नि प्रचण्ड रूप से प्रज्वलित हुई और अग्निकुण्ड से साक्षात् अग्निदेव प्रकट हुए।

अग्निदेव के हाथ में एक स्वर्ण पात्र था जिसमें दिव्य खीर (पायसम) भरी थी। अग्निदेव ने कहा — "हे राजन! यह दिव्य खीर देवताओं के अंश से निर्मित है। इसे अपनी तीनों रानियों को खिलाइए, आपको दिव्य पुत्रों की प्राप्ति होगी।"

राजा दशरथ ने अत्यन्त हर्षित होकर वह दिव्य खीर ग्रहण की। उन्होंने उस खीर को तीन भागों में बाँटा — एक भाग कौशल्या को, एक भाग सुमित्रा को और एक भाग कैकेयी को दिया। तीनों रानियों ने श्रद्धापूर्वक दिव्य खीर का सेवन किया।

समय बीता और चैत्र मास शुक्ल पक्ष का नवमी तिथि का पवित्र दिन आया। पुनर्वसु नक्षत्र में, कर्क लग्न में, दोपहर के समय, जब सूर्यदेव सर्वोच्च स्थान पर थे — माता कौशल्या की कोख से साक्षात् भगवान विष्णु ने श्रीराम के रूप में अवतार लिया।

सम्पूर्ण अयोध्या आनन्द से भर गई। नगर-नगर में ढोल-नगाड़े बजे, घर-घर में दीपमालाएँ जलीं। आकाश से देवताओं ने पुष्पवर्षा की। अप्सराएँ नृत्य करने लगीं। गन्धर्वों ने मधुर गान किया। ब्रह्माजी, इन्द्रदेव और सभी देवता राम के दर्शन को आए।

कुछ काल बाद कैकेयी ने भरत को और सुमित्रा ने लक्ष्मण और शत्रुघ्न को जन्म दिया। चारों राजकुमार अयोध्या की शोभा बने।

श्रीराम का जीवन मर्यादा, धर्म, त्याग और करुणा का आदर्श बना। उन्होंने पिता की आज्ञा से चौदह वर्ष वनवास किया, लंकापति रावण का वध किया, सीता माता को मुक्त कराया और धर्म की स्थापना की। रामराज्य में प्रजा सुखी थी, अन्याय कहीं नहीं था।

तभी से चैत्र शुक्ल नवमी को राम नवमी के रूप में मनाया जाता है। भक्तजन व्रत रखते हैं, श्रीराम की पूजा करते हैं, रामचरितमानस का पाठ करते हैं और मन्दिरों में भगवान राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान का विशेष श्रृंगार होता है।

॥ व्रत विधि ॥

चैत्र शुक्ल नवमी को प्रातःकाल स्नान करके श्रीराम की पूजा करें।

श्रीराम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान की मूर्ति स्थापित करें।

षोडशोपचार पूजा करें — चन्दन, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य अर्पित करें।

रामचरितमानस का सुन्दरकाण्ड या बालकाण्ड का पाठ करें।

कथा श्रवण करें और आरती करें।

॥ मन्त्र ॥

श्री राम जय राम जय जय राम।

ॐ श्री रामाय नमः।

॥ इति श्री राम नवमी व्रत कथा सम्पूर्ण ॥

Benefits (फल)

  • Invokes Lord Rama's blessings for dharma and righteousness
  • Grants peace, prosperity and harmony in family life
  • Bestows courage and moral strength to follow the path of duty
  • Observing the vrat on Chaitra Shukla Navami fulfills all desires
  • Inspires an ideal life of sacrifice, truth and compassion

Frequently Asked Questions

Common questions about Ram Navami Vrat Katha

Read Ram Navami Vrat Katha in Hindi — complete story of Lord Rama's birth in Ayodhya. Putreshti Yajna, divine kheer, and Chaitra Navami vrat vidhi. It is dedicated to Shree Rama (श्री राम), the seventh avatar of vishnu. the ideal king and embodiment of dharma and righteousness. This sacred hymn contains 16 verses and is sourced from Valmiki Ramayana.