Shiv Chalisa
शिव चालीसा
About Shiv Chalisa
Among the most cherished prayers to Lord Shiva, Shiv Chalisa (शिव चालीसा) stands as a sacred 40-verse devotional hymn. Drawn from Traditional Hindi Devotional Composition, this text has been cherished by devotees for centuries. Chanting this stotra with devotion is said to bring peace of mind and spiritual upliftment as well as destroy the effects of negative planetary influences. Additionally, it is known to remove all obstacles, sorrows, and fears. For best results, devotees chant this on Monday (Somvar) and during Maha Shivaratri and Shravan month. With 40 verses and a reading time of about 12 minutes, this prayer is ideal for both daily worship and special occasions. On this page, you can read the complete Shiv Chalisa in Devanagari Sanskrit with English transliteration, Hindi meaning (arth), and free PDF download for offline recitation.
Reviewed & translated by Acharya Pushyadant Mishra
Stotra Path (स्तोत्र पाठ)
॥ दोहा ॥
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥
जय गिरिजापति दीनदयाला।
सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥
॥ चौपाई ॥
जय जय जय अनन्त अविनाशी।
करत कृपा सब के घट वासी॥
दुष्ट सकल नित मोहि सतावैं।
भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवैं॥
त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारौं।
यहि अवसर मोहि आन उबारौं॥
लै त्रिशूल शत्रुन को मारो।
संकट से मोहि आन उबारो॥
माता पिता भ्राता सब कोई।
संकट में पूछत नहिं कोई॥
स्वामी एक है आस तुम्हारी।
आय हरहु अब संकट भारी॥
धन निर्धन को देत सदाहीं।
जो कोई जांचे वो फल पाहीं॥
अस्त-कोट रूप निरखत तेरा।
एक वृष आन अचम्भो मेरा॥
दोषन को दंडी नहिं कोई।
शम्भु विचारे बनत न सोई॥
धन्य-धन्य वह देह तुम्हारी।
सुन मन हरत विषम भवभारी॥
एक समय तुम पार्वति संगा।
बैठे थे करते अनुरागा॥
विष्णुजी बैठे सोचत ठाढ़े।
मुनिजन पूजत सिद्ध अगाड़ी॥
त्रिगुण रूप निरखत जग सारा।
तुम समान कोई नाहिं संसारा॥
महिमा कहाँ तुम्हारी जाई।
गंगाधर बात कहत न बनाई॥
शिव पार्वती की जय बोलो।
दोनों कृपा दृष्टि से तोलो॥
कृपा दृष्टि जब करो हमारी।
संकट कटत मिटत भवभारी॥
त्रिभुवन मातु चन्द्रमुख चारी।
तुम्हें बिना सुख पावे नाहीं कोई नर-नारी॥
केवल पार्वती संग तिहारे।
यह आनंद मंगल सुख सारे॥
शम्भु सदा तुम पर बलिहारी।
करत हैं शम्भू कष्ट निवारी॥
नंदी भृंगी बिन पग धारी।
कंचन मेरु कनक छबि न्यारी॥
कनकसभा करते रावण पूजा।
भोलेनाथ और नहिं दूजा॥
कामधेनु गृह करत उजारा।
तीनों लोक में सबसे न्यारा॥
जो ध्यावे फल पावे सोई।
दुख न ताके निकट रहे कोई॥
वृषभ चढ़े शिव चले पठारी।
करत त्रिशूल ताड़ संहारी॥
गलसुन्दर मृगछाल विराजे।
विषधर भुजंग कंठ में साजे॥
जा पर कृपा करे रघुराई।
ता पर कृपा करे शम्भु मेरे भाई॥
शंकर हो संकट के नाशा।
मंगल मूरत रूप विलासा॥
विघ्न विनाशन मंगल कारी।
सुख सम्पत्ति करो भवतारी॥
पार्वती अम्बे मैया जगदम्बा।
भोले शम्भु सदा सुखदम्बा॥
देवन के देवा महादेवा।
तन धर माथे लगत फूल बेला॥
मुनि महेश की करौ भक्ती।
सदा करौ शम्भु की रक्ती॥
शम्भु कर चढ़ो विशेष पूजा।
तब ही कटे सब दुख का दूजा॥
बूंद-बूंद चढ़ाओ जलधारा।
सुख सम्पत्ति हो सब संसारा॥
शम्भू को चढ़ाओ बिल्वपत्र।
तुरंत मिले शिव दर्शन सर्वत्र॥
चन्दन चढ़ाओ त्रिपुरारी।
शिवजी की कृपा हो अपारी॥
भाँग-धतूर चढ़ाओ भोले।
सर्व सिद्धि करो शिव तोले॥
ग्रह कलेश दुख मिटावो।
सुख सम्पत्ति भक्ति घर लावो॥
जहाँ कहीं पीर शम्भु धरावो।
वहाँ-वहाँ अपना भक्त बचावो॥
॥ दोहा ॥
नित्त नेम करि प्रातःकाल, पाठ करौ चालीसा।
तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीशा॥
मगसर छठि हेमन्त ऋतु, सम्वत् चौसठ जान।
स्तुति चालीसा शिव करी, पूर्ण कीन कल्याण॥
Benefits (फल)
- ★Fulfills all desires and wishes of the devotee
- ★Removes all obstacles, sorrows, and fears
- ★Grants wealth, prosperity, and material comforts
- ★Protects from enemies and evil forces
- ★Brings peace of mind and spiritual upliftment
- ★Daily recitation brings Lord Shiva's divine blessings
- ★Destroys the effects of negative planetary influences
