Shukravar Vrat Katha (Friday Fasting Story)
शुक्रवार व्रत कथा
About Shukravar Vrat Katha (Friday Fasting Story)
Shukravar Vrat Katha (Friday Fasting Story) (शुक्रवार व्रत कथा) is a sacred prayer dedicated to Goddess Lakshmi. This sacred composition is sourced from Lakshmi Purana and continues to inspire devotees worldwide. Chanting this stotra with devotion is said to sour food is prohibited during the vrat for full effectiveness as well as ensure permanent residence of Lakshmi in the devotee's home. Additionally, it is known to grant wealth, prosperity, children, and good fortune. Recitation is particularly auspicious on Friday (Shukravar) and during Diwali and Dhanteras. Comprising 12 verses, it can be completed in approximately 10 minutes, making it suitable for daily devotional practice. On this page, you can read the complete Shukravar Vrat Katha (Friday Fasting Story) in Devanagari Sanskrit with English transliteration, Hindi meaning (arth), and free PDF download for offline recitation.
Reviewed & translated by Acharya Pushyadant Mishra
Stotra Path (स्तोत्र पाठ)
॥ श्री शुक्रवार व्रत कथा ॥
ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः॥
॥ व्रत विधि ॥
शुक्रवार का व्रत माता लक्ष्मी (सन्तोषी माता) को समर्पित है। प्रातःकाल स्नान करके श्वेत या लाल वस्त्र धारण करें। माता लक्ष्मी या सन्तोषी माता की पूजा करें। गुड़-चने का प्रसाद बनाएँ। खट्टा भोजन वर्जित है। एक समय भोजन करें। सायंकाल कथा सुनें।
॥ कथा ॥
प्राचीन काल में एक वृद्धा थी जो बहुत निर्धन थी।
किन्तु वह प्रत्येक शुक्रवार को व्रत रखती
और माता लक्ष्मी की पूजा करती थी।
वह अपनी झोपड़ी को साफ-सुथरा रखती,
दीपक जलाती और माता की आरती करती थी॥
उसी नगर में एक धनी स्त्री रहती थी
जो अत्यन्त घमण्डी और कंजूस थी।
वह कभी व्रत नहीं करती और माता लक्ष्मी की पूजा नहीं करती थी।
वह वृद्धा का उपहास करती और कहती —
निर्धन होकर पूजा से क्या लाभ?॥
एक शुक्रवार को माता लक्ष्मी एक वृद्धा का रूप धारण करके
धनी स्त्री के घर गईं और कहा — क्या तुम मुझे आश्रय दोगी?
धनी स्त्री ने मना कर दिया और दुर्वचन बोले।
तब माता निर्धन वृद्धा के पास गईं।
वृद्धा ने आदरपूर्वक उन्हें अपनी झोपड़ी में स्थान दिया,
भोजन कराया और सेवा की॥
रात्रि में माता लक्ष्मी ने अपना असली रूप दिखाया
और कहा — बेटी, मैं तेरी भक्ति से प्रसन्न हूँ।
तू शुक्रवार का व्रत सदा करती है इसलिए
मैं सदा तेरे घर में निवास करूँगी।
तुझे धन-धान्य, सुख-सम्पत्ति सब प्राप्त होगा॥
प्रातःकाल वृद्धा की झोपड़ी एक सुन्दर घर में बदल गई।
अनाज, धन और सुख-समृद्धि से भर गई।
उधर धनी स्त्री का सब कुछ नष्ट हो गया।
वह निर्धन और दुःखी हो गई।
तब उसे अपनी गलती का बोध हुआ
और उसने भी शुक्रवार का व्रत प्रारम्भ किया॥
माता लक्ष्मी की कृपा से उसकी भी दशा सुधरी।
दोनों ने आजीवन शुक्रवार का व्रत किया
और माता लक्ष्मी की कृपा से सुखपूर्वक जीवन व्यतीत किया॥
॥ फलश्रुति ॥
जो स्त्री या पुरुष श्रद्धापूर्वक शुक्रवार का व्रत करता है
और इस कथा को सुनता है, उसके घर में माता लक्ष्मी
का स्थायी निवास होता है। धन-धान्य, सुख-सम्पत्ति,
सन्तान और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
शुक्र ग्रह की पीड़ा शान्त होती है।
॥ इति श्री शुक्रवार व्रत कथा सम्पूर्णा ॥
Benefits (फल)
- ★Traditional fasting story for Friday dedicated to Goddess Lakshmi
- ★Ensures permanent residence of Lakshmi in the devotee's home
- ★Grants wealth, prosperity, children, and good fortune
- ★Pacifies afflictions of planet Venus (Shukra Graha)
- ★Sour food is prohibited during the vrat for full effectiveness
- ★Especially popular among women for saubhagya (marital bliss)
