Vaibhava Lakshmi Vrat Katha
वैभव लक्ष्मी व्रत कथा
About Vaibhava Lakshmi Vrat Katha
Vaibhava Lakshmi Vrat Katha (वैभव लक्ष्मी व्रत कथा) is a sacred prayer dedicated to Goddess Lakshmi. Attributed to Traditional, this prayer holds a special place in Hindu devotional literature. Devotees recite this prayer to remove financial difficulties and debts and bring wealth, prosperity and abundance to the household. It is also said to fulfill all material and spiritual wishes. Recitation is particularly auspicious on Friday (Shukravar) and during Diwali and Varalakshmi Vrata. Comprising 6 verses, it can be completed in approximately 10 minutes, making it suitable for daily devotional practice. On this page, you can read the complete Vaibhava Lakshmi Vrat Katha in Devanagari Sanskrit with English transliteration, Hindi meaning (arth), and free PDF download for offline recitation.
Reviewed & translated by Acharya Pushyadant Mishra
Stotra Path (स्तोत्र पाठ)
॥ श्री वैभव लक्ष्मी व्रत कथा ॥
ॐ श्री लक्ष्मी देव्यै नमः।
॥ कथा ॥
प्राचीन काल में एक नगर में शीला नाम की एक गरीब किन्तु धर्मपरायण स्त्री रहती थी। उसके पति दिनभर मेहनत करते थे, फिर भी घर में दो वक्त की रोटी का भी कठिनाई से प्रबन्ध होता था। ऊपर से कर्ज का बोझ बढ़ता ही जा रहा था। शीला बहुत चिन्तित रहती थी।
एक दिन शीला अपनी सखी सुमित्रा के घर गई। सुमित्रा का घर धन-धान्य से भरपूर था। शीला ने पूछा — "सखी! तुम्हारे घर में इतनी सुख-समृद्धि कैसे आई?" सुमित्रा ने मुस्कराकर कहा — "शीला! मैंने वैभव लक्ष्मी व्रत किया है। इक्कीस शुक्रवार तक श्रद्धापूर्वक यह व्रत करने से माँ लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है।"
शीला ने तुरन्त व्रत का संकल्प ले लिया। अगले शुक्रवार से उसने व्रत आरम्भ किया। प्रातःकाल उठकर स्नान किया, स्वच्छ वस्त्र पहने। उसने एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माँ लक्ष्मी का चित्र स्थापित किया। फिर सिन्दूर, अक्षत, पुष्प, धूप और दीपक से माँ की पूजा की। उसने श्रद्धापूर्वक कथा सुनी और प्रसाद बाँटा।
शीला ने पूरे इक्कीस शुक्रवार तक बिना किसी रुकावट के व्रत किया। हर शुक्रवार वह सिन्दूर, चावल, फूल और दीपक अर्पित करती। कथा सुनते समय उसका मन पूर्ण रूप से माँ लक्ष्मी के चरणों में लगा रहता।
माँ लक्ष्मी शीला की भक्ति से प्रसन्न हुईं। धीरे-धीरे शीला के भाग्य बदलने लगे। उसके पति को एक अच्छी नौकरी मिल गई। जो कर्ज सालों से चला आ रहा था, वह चुकता हो गया। घर में अन्न-धन की कोई कमी नहीं रही। शीला का घर सुख-समृद्धि से भर गया। परिवार में आनन्द और शान्ति छा गई।
शीला की पड़ोसिन कमला सदा शीला का उपहास करती थी। जब शीला व्रत करती तो कमला हँसकर कहती — "इन पूजा-पाठ से कुछ नहीं होता। यह सब ढोंग है।" किन्तु जब कमला ने देखा कि शीला का दरिद्र घर धन-सम्पत्ति से भर गया, तो उसे बहुत आश्चर्य हुआ।
कुछ समय पश्चात् कमला के घर पर विपत्तियाँ आने लगीं। उसके पति का व्यापार डूब गया, घर में कलह बढ़ने लगा और धन का अभाव हो गया। तब कमला को अपनी भूल का अहसास हुआ। वह शीला के पास आई और बोली — "सखी! मुझे क्षमा करो। मैंने तुम्हारी भक्ति का उपहास किया था। कृपया मुझे भी वैभव लक्ष्मी व्रत की विधि बताओ।"
शीला ने प्रेमपूर्वक कमला को सारी विधि बताई। कमला ने सच्चे हृदय से व्रत आरम्भ किया। उसने इक्कीस शुक्रवार तक पूर्ण श्रद्धा और विश्वास से माँ लक्ष्मी की पूजा की। माँ लक्ष्मी कमला की सच्ची भक्ति से भी प्रसन्न हुईं और उसके घर में भी सुख-शान्ति और धन-सम्पत्ति लौट आई।
इस प्रकार जो भी स्त्री या पुरुष श्रद्धापूर्वक इक्कीस शुक्रवार वैभव लक्ष्मी व्रत करता है, माँ लक्ष्मी उस पर अवश्य कृपा करती हैं। घर में धन-धान्य, सुख-शान्ति और सौभाग्य आता है।
॥ व्रत विधि ॥
प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
पूजास्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।
श्री लक्ष्मी देवी का चित्र या मूर्ति स्थापित करें।
सिन्दूर, अक्षत, पुष्प, धूप और दीपक अर्पित करें।
कथा श्रवण करें और प्रसाद वितरित करें।
॥ पूजा मन्त्र ॥
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः।
नमस्ते सर्वदेवानां वरदासि हरिप्रिये।
या गतिस्त्वत्प्रपन्नानां सा मे भूयात्त्वदर्चनात्॥
॥ उद्यापन ॥
इक्कीसवें शुक्रवार को व्रत का उद्यापन करें।
विशेष पूजा करें और ब्राह्मणों को भोजन कराएँ।
सुहागिन स्त्रियों को श्रृंगार सामग्री प्रदान करें।
॥ इति श्री वैभव लक्ष्मी व्रत कथा सम्पूर्णा ॥
Benefits (फल)
- ★Brings wealth, prosperity and abundance to the household
- ★Ensures marital bliss and family harmony
- ★Removes financial difficulties and debts
- ★Bestows the divine grace of Goddess Lakshmi
- ★Fulfills all material and spiritual wishes
