Shree Lakshmi — goddess of wealth, fortune, and prosperityShree Lakshmi

Diwali Vrat Katha

दिवाली व्रत कथा

12 min read20 versesSource: Skanda Purana - Traditional

About Diwali Vrat Katha

Diwali Vrat Katha (दिवाली व्रत कथा) is a sacred prayer dedicated to Goddess Lakshmi. This revered text originates from Skanda Purana and traditional Puranic sources. It narrates how a devoted princess saved her husband from death by lighting countless diyas and piling gold at the door, earning Lakshmi's eternal blessing. It also includes the story of Lord Rama's return to Ayodhya. Chanting this katha with devotion invokes Lakshmi's blessings for wealth, prosperity, and protection from misfortune. Recitation is particularly auspicious during Diwali and Dhanteras. Comprising 20 verses with a reading time of about 12 minutes, this katha is essential for Diwali observance. On this page, you can read the complete Diwali Vrat Katha in Devanagari Sanskrit with English transliteration, Hindi meaning (arth), and free PDF download for offline recitation.

Reviewed & translated by Acharya Pushyadant Mishra

Stotra Path (स्तोत्र पाठ)

॥ श्री दिवाली व्रत कथा ॥

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।

॥ दिवाली माहात्म्य ॥

कार्तिक अमावस्या को दिवाली का पावन पर्व मनाया जाता है। इस दिन माँ लक्ष्मी और श्री गणेश की विशेष पूजा होती है। घर-घर में दीपक जलाये जाते हैं। यह अन्धकार पर प्रकाश की विजय का पर्व है।

॥ प्रथम कथा — राजकुमारी और दीपों का चमत्कार ॥

प्राचीन काल में एक प्रतापी राजा था। उसकी एक अत्यन्त सुन्दर और धर्मपरायण पुत्री थी। वह राजकुमारी बचपन से ही माँ लक्ष्मी की परम भक्त थी। प्रतिदिन वह लक्ष्मी पूजा करती, दीपक जलाती और गरीबों को दान देती।

जब राजकुमारी विवाह योग्य हुई, तो राजा ने एक योग्य राजकुमार से उसका विवाह कर दिया। किन्तु विवाह के समय एक प्रसिद्ध ज्योतिषी ने राजा को बताया — "महाराज! आपके दामाद की कुण्डली में अशुभ ग्रह दोष है। विवाह के चौथे दिन यम उसके प्राण हर लेगा।"

राजा और रानी अत्यन्त दुःखी हुए। किन्तु राजकुमारी ने धैर्य नहीं छोड़ा। उसे माँ लक्ष्मी पर अटल विश्वास था।

विवाह के चौथे दिन की रात्रि आई। राजकुमारी ने अपने कक्ष के द्वार पर सोने-चाँदी के सिक्कों और आभूषणों का विशाल ढेर लगा दिया। घर के हर कोने में, द्वार पर, खिड़कियों पर, आँगन में — असंख्य दीपक जलाये। इतने दीपक कि पूरा महल सूर्य के समान जगमगा उठा। अन्धकार का कहीं नाम तक नहीं रहा।

फिर राजकुमारी ने अपने पति को जगाये रखने के लिये रात भर कथाएँ सुनाईं, भजन गाये, गीत गाये। पति को सोने नहीं दिया।

मध्यरात्रि में यमराज सर्प के रूप में आये। किन्तु द्वार पर सोने-चाँदी का ढेर इतना विशाल था कि सर्प अन्दर नहीं आ सका। हजारों दीपकों का तेज प्रकाश सर्प की आँखों में चुभ गया। वह कुछ देख नहीं पाया।

यमराज सर्प रूप में उस सोने-चाँदी के ढेर पर बैठ गये और पूरी रात्रि राजकुमारी के मधुर भजन सुनते रहे। प्रभात हुआ — और यमराज बिना प्राण हरे लौट गये।

इस प्रकार राजकुमारी ने अपनी भक्ति, बुद्धि और दीपकों के प्रकाश से मृत्यु को पराजित किया।

माँ लक्ष्मी प्रकट हुईं और बोलीं — "हे पुत्री! तुम्हारी भक्ति और विवेक से मैं अत्यन्त प्रसन्न हूँ। तुम्हारे पति को दीर्घायु प्राप्त होगी। तुम्हारे घर में सदा समृद्धि रहेगी। आज से जो मनुष्य कार्तिक अमावस्या को दीपक जलाकर मेरी पूजा करेगा, उसके घर में कभी दरिद्रता नहीं आयेगी, अकाल मृत्यु नहीं होगी।"

तभी से कार्तिक अमावस्या को दीपावली मनाई जाती है। दीपक जलाये जाते हैं और लक्ष्मी-गणेश पूजा की जाती है।

॥ द्वितीय कथा — श्रीराम का अयोध्या आगमन ॥

त्रेतायुग में भगवान श्रीराम चौदह वर्ष का वनवास पूर्ण करके और लंकापति रावण का वध करके अयोध्या लौटे। उनके आगमन पर अयोध्यावासियों ने घर-घर में दीपक जलाकर उनका भव्य स्वागत किया। अमावस्या की काली रात दीपों से जगमगा उठी। तभी से दिवाली पर दीपक जलाने की परम्परा है।

॥ दिवाली पूजा विधि ॥

कार्तिक अमावस्या को सायंकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।

घर की सफाई करें — लक्ष्मीजी स्वच्छ घर में पधारती हैं।

लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।

पहले गणेश पूजा करें, फिर लक्ष्मी पूजा।

लाल वस्त्र, कमल पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य (खील-बताशे) अर्पित करें।

व्रत कथा का श्रवण करें।

घर के हर कोने में दीपक जलायें — अन्धकार न रहे।

रात्रि में जागरण करें।

॥ मन्त्र ॥

नमस्ते सर्वदेवानां वरदासि हरिप्रिये।

या गतिस्त्वत्प्रपन्नानां सा मे भूयात्त्वदर्चनात्॥

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः।

॥ इति श्री दिवाली व्रत कथा सम्पूर्ण ॥

Benefits (फल)

  • Complete Diwali vrat katha with Lakshmi puja vidhi and mantras
  • Invokes Goddess Lakshmi's blessings for wealth and eternal prosperity
  • Protects from untimely death and removes all misfortunes
  • Lighting diyas on Diwali dispels darkness and invites divine grace
  • Essential reading for Diwali and Dhanteras observance
  • Includes the story of Lord Rama's return to Ayodhya

Frequently Asked Questions

Common questions about Diwali Vrat Katha

Read Diwali Vrat Katha in Hindi with Lakshmi puja vidhi and mantras. Complete story for wealth, prosperity, and protection on Deepavali. It is dedicated to Shree Lakshmi (श्री लक्ष्मी), goddess of wealth, fortune, and prosperity. consort of lord vishnu. This sacred hymn contains 20 verses and is sourced from Skanda Purana - Traditional.