Sharad Purnima Vrat Katha
शरद पूर्णिमा व्रत कथा
About Sharad Purnima Vrat Katha
Sharad Purnima Vrat Katha (शरद पूर्णिमा व्रत कथा) is a sacred prayer dedicated to Goddess Lakshmi. This revered text originates from the Bhagavata Purana and traditional sources. Reciting this katha with devotion invokes Lakshmi's blessings for wealth and health, grants healthy progeny, and deepens spiritual devotion. Recitation is particularly auspicious during Sharad Purnima. Comprising 14 verses, it can be completed in approximately 12 minutes, making it ideal for festival night worship. On this page, you can read the complete Sharad Purnima Vrat Katha in Devanagari Sanskrit with English transliteration, Hindi meaning (arth), and free PDF download for offline recitation.
Reviewed & translated by Acharya Pushyadant Mishra
Stotra Path (स्तोत्र पाठ)
॥ श्री शरद पूर्णिमा व्रत कथा ॥
ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः।
॥ कथा ॥
बहुत पुराने समय की बात है। एक नगर में एक साहूकार रहता था। उसकी दो पुत्रियाँ थीं — बड़ी पुत्री श्रद्धालु और धर्मपरायण थी, छोटी पुत्री आलसी और उदासीन थी।
दोनों पुत्रियाँ प्रत्येक पूर्णिमा को व्रत रखती थीं, किन्तु बड़ी पुत्री पूर्ण विधि-विधान से, मन लगाकर, श्रद्धापूर्वक व्रत करती थी। वह पूर्णिमा के चन्द्रमा को अर्घ्य देती, कथा सुनती, दान करती और रात्रि जागरण करती। छोटी पुत्री केवल दिखावे के लिए व्रत रखती — न विधि का ध्यान, न श्रद्धा, बीच में ही व्रत तोड़ देती और कथा भी अधूरी सुनती।
समय आया दोनों का विवाह हुआ। बड़ी पुत्री का विवाह एक सज्जन, धनवान और प्रेमी पति से हुआ। उसके घर में सुख-सम्पत्ति बनी रही, सन्तान हुई, परिवार फला-फूला। सब कहते — "पूर्णिमा माता की कृपा है।"
किन्तु छोटी पुत्री का भाग्य कठोर था। उसका विवाह तो अच्छे घर में हुआ, किन्तु सन्तान टिकती नहीं थी। जो भी बालक पैदा होता, कुछ ही दिनों में मर जाता। छोटी पुत्री शोक और विलाप में डूबी रहती। उसने अनेक औषधियाँ कीं, पूजा-पाठ कराए, किन्तु कोई लाभ नहीं हुआ।
एक दिन वह अपनी बड़ी बहन के घर गई। उसने देखा — बड़ी बहन सुखी है, उसके बच्चे स्वस्थ और प्रसन्न हैं, घर में धन-धान्य भरपूर है। छोटी बहन ने पूछा — "दीदी! आपका ऐसा सौभाग्य कैसे है? मेरी सन्तान क्यों नहीं बचती?"
बड़ी बहन ने कहा — "बहन! तू पूर्णिमा का व्रत तो रखती है, किन्तु विधि-विधान से नहीं रखती। बीच में तोड़ देती है, कथा पूरी नहीं सुनती, श्रद्धा नहीं रखती। इसी कारण पूर्णिमा माता रुष्ट हैं।"
छोटी बहन को अपनी गलती का बोध हुआ। उसी समय एक वृद्ध ज्योतिषी भी वहाँ आए। उन्होंने छोटी बहन का हाथ देखकर कहा — "बेटी! तेरे भाग्य में दोष है क्योंकि तूने पूर्णिमा व्रत का अपमान किया। अब आने वाली शरद पूर्णिमा को पूर्ण श्रद्धा और विधि से व्रत कर। रात्रि में चन्द्रमा की रोशनी में खीर रखना, चन्द्रमा की किरणों से वह खीर अमृत बन जाएगी। उस खीर को प्रसाद के रूप में ग्रहण करना।"
छोटी बहन ने आश्विन मास की पूर्णिमा अर्थात् शरद पूर्णिमा का व्रत पूर्ण विधि-विधान से किया। उसने दिनभर निराहार रहकर लक्ष्मी देवी की पूजा की। सन्ध्या को चन्द्रोदय पर अर्घ्य दिया। रात्रि में चाँदी के पात्र में दूध, चावल, मिश्री, इलायची और केसर की खीर बनाकर चन्द्रमा की रोशनी में रखी।
पूरी रात चन्द्रमा की शीतल किरणें उस खीर पर पड़ती रहीं। प्रातःकाल उसने वह खीर प्रसाद के रूप में ग्रहण की। लक्ष्मी देवी प्रसन्न हुईं। उसके बाद छोटी बहन को स्वस्थ सन्तान हुई, बच्चे जीवित रहे और उसके घर में सुख-शान्ति लौट आई।
इसी शरद पूर्णिमा की रात्रि को भगवान श्रीकृष्ण ने वृन्दावन में गोपियों के साथ महारास लीला भी की थी। यह वर्ष की सबसे पवित्र और शीतल चाँदनी रात मानी जाती है जब चन्द्रमा अपनी सोलह कलाओं से पूर्ण होता है और उसकी किरणों में अमृत बरसता है।
॥ व्रत विधि ॥
आश्विन मास की पूर्णिमा को प्रातःकाल स्नान करके लक्ष्मी-विष्णु की पूजा करें।
दिनभर व्रत रखें।
सन्ध्या को चन्द्रोदय पर चन्द्रमा को अर्घ्य दें।
खीर बनाकर चन्द्रमा की रोशनी में रखें — रात्रिभर।
प्रातःकाल खीर प्रसाद ग्रहण कर व्रत तोड़ें।
कथा श्रवण करें।
॥ मन्त्र ॥
ॐ श्रीं ह्रीं श्री महालक्ष्म्यै नमः।
॥ इति श्री शरद पूर्णिमा व्रत कथा सम्पूर्ण ॥
Benefits (फल)
- ★Invokes Goddess Lakshmi's blessings for wealth and health
- ★Moonlit kheer (amrit kheer) on this night has healing properties
- ★Grants healthy progeny and ensures children's well-being
- ★The most auspicious full moon night of the year for worship
- ★Associated with Krishna's Maha Raas — deepens spiritual devotion
