Jagannath Chalisa
जगन्नाथ चालीसा
About Jagannath Chalisa
The Jagannath Chalisa, known in Sanskrit as जगन्नाथ चालीसा, is a sacred 40-verse devotional hymn in praise of Lord Jagannath. This revered text originates from Traditional Chalisa Sangrah. Regular recitation is believed to grant moksha and liberation from the cycle of birth and death, remove caste and social discrimination through Jagannath's grace, and fulfill all material and spiritual desires of devotees. Recitation is particularly auspicious on Thursday (Guruvar) and Sunday (Ravivar) and during Rath Yatra and Snana Yatra. The text contains 42 verses and takes around 15 minutes to recite, fitting conveniently into a daily spiritual routine. On this page, you can read the complete Jagannath Chalisa in Devanagari Sanskrit with English transliteration, Hindi meaning (arth), and free PDF download for offline recitation.
Reviewed & translated by Acharya Pushyadant Mishra
Stotra Path (स्तोत्र पाठ)
॥ दोहा ॥
जगन्नाथ प्रभु चरन सरोज, मन में ध्यान लगाय।
चालीसा कहूँ भक्ति से, पूरी करो मनकाय॥
पुरी धाम के स्वामी तुम, जगत पालन अधिकार।
करो कृपा दासन पर, हरो सकल संसार॥
॥ चौपाई ॥
जय जय जगन्नाथ भगवाना।
पुरी धाम के तुम हो राणा॥
सुभद्रा बलभद्र संग विराजे।
तीनों मूर्ति अतुल छवि साजे॥
नीलाचल पर्वत पर बैठे।
चार धाम में एक तुम पैठे॥
इन्द्रनील मणि सम तन सोहे।
विशाल नेत्र सब जन को मोहे॥
राजा इन्द्रद्युम्न ने पाया।
नीलमाधव रूप दिखाया॥
विश्वकर्मा ने मूर्ति बनाई।
अपूर्ण रूप में छवि छपाई॥
गुण्डिचा रानी भक्ति बढ़ावे।
मंदिर निर्माण करि सुख पावे॥
रथ यात्रा जग प्रसिद्ध तिहारी।
तीनों रथ सजे छवि भारी॥
नन्दिघोष रथ तुम्हरे सोहे।
तालध्वज बलराम को मोहे॥
दर्पदलन रथ सुभद्रा राजे।
तीनों रथ गुण्डिचा को साजे॥
महाप्रसाद अन्नक्षेत्र भारी।
छप्पन भोग लगत सुखकारी॥
सब जाति को प्रसाद मिलावे।
जगन्नाथ पुरी भेद मिटावे॥
पुरी के पंच तीर्थ बखाने।
मार्कण्डेय सागर जो जाने॥
चैतन्य महाप्रभु आये।
जगन्नाथ दर्शन सुख पाये॥
गजपति राजा सेवा कीन्हा।
छेरा पहरा विधि जो दीन्हा॥
नीलाद्रि महोदधि जग साजे।
जगन्नाथ कथा सुख के काजे॥
जो पुरी धाम दर्शन पावे।
सो मुक्ति पथ निश्चय जावे॥
चारों धाम में एक तिहारा।
पूर्व दिशा का धाम न्यारा॥
जगत जननी सुभद्रा माता।
बलभद्र तुम्हरे प्रिय भ्राता॥
सुदर्शन चक्र विराज रहा है।
जगन्नाथ धाम सुहाया है॥
नवकलेवर महोत्सव होवे।
मूर्ति नई सब जगत को जोवे॥
आषाढ़ पूर्णिमा रथ चलावे।
लाखों भक्त दर्शन पावे॥
स्नान यात्रा ज्येष्ठ में होवे।
जगन्नाथ नील रूप में जोवे॥
जो जगन्नाथ शरण में आवे।
सो भव सागर पार करावे॥
चालीसा पढ़ विनय करावे।
जगन्नाथ कृपा नित पावे॥
सकल मनोरथ पूरण होवें।
दुख दरिद्र सब दूर खोवें॥
भक्ति भाव से पाठ करीजे।
जगन्नाथ प्रभु दर्शन दीजे॥
चालीसा जो नित प्रति गावे।
सो परम पद निश्चय पावे॥
॥ दोहा ॥
जगन्नाथ चालीसा पढ़े, भक्ति भाव मन धार।
पुरी धाम का पुण्य मिले, हो मोक्ष का द्वार॥
Benefits (फल)
- ★Bestows the merit of visiting Puri Dham - one of the Char Dhams
- ★Grants moksha and liberation from the cycle of birth and death
- ★Removes caste and social discrimination through Jagannath's grace
- ★Fulfills all material and spiritual desires of devotees
- ★Special significance during Rath Yatra festival
