Sai Chalisa
श्री साई चालीसा
About Sai Chalisa
Sai Chalisa (श्री साई चालीसा) is a sacred 40-verse devotional hymn dedicated to Shree Sai Baba of Shirdi. Drawn from Traditional Sai Bhakti Literature, this text has been cherished by devotees for centuries. Chanting this stotra with devotion is said to fulfill all heartfelt desires through Sai Baba's grace as well as bestow peace, prosperity and spiritual contentment. Additionally, it is known to promote communal harmony and universal brotherhood. This prayer is traditionally recited on Thursday (Guruvar) and during Guru Purnima to invoke divine grace. The text contains 20 verses and takes around 15 minutes to recite, fitting conveniently into a daily spiritual routine. On this page, you can read the complete Sai Chalisa in Devanagari Sanskrit with English transliteration, Hindi meaning (arth), and free PDF download for offline recitation.
Reviewed & translated by Acharya Pushyadant Mishra
Stotra Path (स्तोत्र पाठ)
॥ श्री साई चालीसा ॥
॥ दोहा ॥
प्रथम साईं के चरण में, करता मस्तक टेक।
सकल मनोरथ पूर्ण कर, रखना अपनी शेक॥
जय साईं जय साईं जय, करुणासागर साईं।
भक्तन हित अवतार लिय, सब सुख देत सदाईं॥
॥ चौपाई ॥
शिर्डी नगर विराजे साईं। कृपा करो दयानिधि भाईं॥
चरण शरण में हमें रखो तुम। प्रेम भक्ति से तुम्हें भजूँ मैं॥ १॥
पतित पावन तुम हो दाता। सकल जगत के हो विधाता॥
भक्त हेतु तुम शिर्डी आये। चमत्कार बहु दिखलाये॥ २॥
जल को पलटत तेल बनाया। अचरज सबने बहुत मनाया॥
भक्तों को तुम दर्शन देते। उनके सकल कष्ट हर लेते॥ ३॥
श्रद्धा सबुरी बताई तुमने। दो शब्दों में ज्ञान सिखाया॥
करुणा निधि तुम दीनदयालू। भक्त हेतु सदा प्रतिपालू॥ ४॥
द्वारकामाई तुम्हारा वासा। पूर्ण करो सबकी मन आशा॥
धूनी साईं तुम्हारी जलती। विपदा भक्तन की हर बलती॥ ५॥
मुसलमान कह जो तुम पुकारे। हिन्दू कहकर जो तुम्हें निहारे॥
दोनों की रखवारी करते। भेद भाव से कभी न डरते॥ ६॥
तुम हो सबके सच्चे साईं। निर्धन हो या धनवान भाईं॥
बाबा तुम्हें मनाऊँ कैसे। प्रेम प्रीत का दान दो ऐसे॥ ७॥
साईं तुम्हारा ही आसरा है। जग में तुम सा नहीं कोई खरा है॥
जो तेरे चरणों में आये। वो कभी खाली नहीं जाये॥ ८॥
मान अपमान तुम्हें नहीं बाबा। जग में तेरा अद्भुत ताबा॥
कुष्ठ रोग जिनको हो जाये। बाबा तेरी उदी लगाये॥ ९॥
सब रोगों से मुक्ति हो जाये। बाबा की कृपा बरसाये॥
भीमा बाई की सेवा कीन्हा। ताहि कंचन तन दीन्हा॥ १०॥
रोग मिटाये भक्तन के तुम। दुख दारिद्र्य भगाये सब तुम॥
मुरली मनोहर रूप तुम्हारा। गोधन चरावत अति प्यारा॥ ११॥
भक्तों को दर्शन दे जाते। अपने प्रेम में सबको बाँधे॥
बाबा तुम हो अन्तर्यामी। पूर्ण ब्रह्म परमात्मा स्वामी॥ १२॥
तुम्हरी शरण गहूँ मैं बाबा। दुखियों का तुम सहारा बाबा॥
सब जग से जो निराश हो आवे। बाबा शरण में शीश नवावे॥ १३॥
सदा सहारा दे तुम उनको। कभी नहीं ठुकराओ जन को॥
भोजन भी तुम भक्तों को देते। प्रेम प्रीत से सबको जीते॥ १४॥
नवधा भक्ति सिखाई सबको। दान धर्म का पाठ पढ़ाया॥
गुरु महिमा तुम करो बखानी। श्रद्धा सबुरी का मर्म जानी॥ १५॥
तुम समर्थ हो सब विधि बाबा। तुम्हरी कृपा से सब कुछ पाया॥
साईं तुम्हें प्रणाम हमारा। तुम हो हमारा रखवारा॥ १६॥
जो ये चालीसा भक्ति से गावे। सकल मनोरथ पूर्ण पावे॥
साईं बाबा की जय हो सदा। भक्तों को मिले सुख सम्पदा॥ १७॥
नित्य पाठ जो कोई करता। भवसागर से वो तर जाता॥
साईं चरण में ध्यान लगाओ। जीवन में सच्चा सुख पाओ॥ १८॥
सत्य प्रेम का मार्ग बताया। बाबा ने सबको सिखलाया॥
जात पांत से ऊपर उठकर। सबको गले से लगाया मिलकर॥ १९॥
साईं बाबा सबके परमेश्वर। सकल लोक के हैं ईश्वर॥
दया दृष्टि सब पर बरसाओ। हम सबके सब कष्ट मिटाओ॥ २०॥
॥ दोहा ॥
साईं चालीसा पढ़े जो कोई।
उसकी बिगड़ी बने सँवर जोई॥
मन कर्म वचन साईं को ध्यावे।
जीवन में सुख शान्ति पावे॥
॥ इति श्री साई चालीसा सम्पूर्णम् ॥
Benefits (फल)
- ★Fulfills all heartfelt desires through Sai Baba's grace
- ★Removes all troubles and suffering from life
- ★Cultivates Shraddha (faith) and Saburi (patience)
- ★Heals physical and mental ailments
- ★Promotes communal harmony and universal brotherhood
- ★Bestows peace, prosperity and spiritual contentment
