Santoshi Mata Vrat Katha
संतोषी माता व्रत कथा
About Santoshi Mata Vrat Katha
Santoshi Mata Vrat Katha (संतोषी माता व्रत कथा) is a sacred prayer dedicated to Goddess Durga (as Santoshi Mata, daughter of Ganesha). Attributed to Santoshi Mata Vrat Katha - Traditional, this prayer is cherished by devotees seeking family harmony and fulfillment of desires. Reciting this katha with devotion is said to bring prosperity, wealth and abundance to the household and grant family harmony. The vrat is observed for 16 Fridays with jaggery and chana offerings. Recitation is particularly auspicious on Friday (Shukravar) and during Navratri. With a reading time of about 12 minutes, this prayer is ideal for weekly Friday worship. On this page, you can read the complete Santoshi Mata Vrat Katha in Devanagari Hindi with English transliteration, Hindi meaning (arth), and free PDF download for offline recitation.
Reviewed & translated by Acharya Pushyadant Mishra
Stotra Path (स्तोत्र पाठ)
॥ श्री संतोषी माता व्रत कथा ॥
ॐ श्री संतोषी माता देव्यै नमः।
॥ कथा ॥
प्राचीन काल में एक बूढ़ी अम्मा थी। उसके तीन बहुएँ थीं। बड़ी दोनों बहुएँ धनी घरों से आई थीं और छोटी बहू गरीब घर की थी। बड़ी बहुएँ छोटी बहू को सदा ताने मारती थीं और उसे घर के सारे काम करने पड़ते थे। छोटी बहू बड़ी भोली और भक्तिमती थी। वह सबकी सेवा चुपचाप करती रहती।
एक दिन छोटी बहू कुएँ पर पानी भरने गई। वहाँ गाँव की कुछ स्त्रियाँ संतोषी माता का व्रत कर रही थीं। उन्होंने छोटी बहू को बताया — "बहन, यदि तू सोलह शुक्रवार का व्रत करे और संतोषी माता को गुड़-चने का भोग लगाए तो माता तेरे सारे दुःख दूर कर देंगी। व्रत में खट्टी चीज़ कभी नहीं खानी चाहिए।"
छोटी बहू ने उसी शुक्रवार से व्रत शुरू कर दिया। वह प्रत्येक शुक्रवार को प्रातःकाल स्नान करके संतोषी माता का पूजन करती, गुड़-चने का प्रसाद चढ़ाती और कथा सुनती। व्रत वाले दिन वह खट्टी वस्तु बिलकुल नहीं खाती थी।
पहले शुक्रवार से ही माता की कृपा बरसने लगी। छोटी बहू के पति को परदेस में अच्छा व्यापार मिल गया। घर में धन-धान्य आने लगा। दूसरे शुक्रवार को पति ने घर सोने-चाँदी के गहने भिजवाए। तीसरे शुक्रवार तक घर में नया मकान बनने लगा। छोटी बहू की किस्मत चमक उठी।
जब बड़ी जेठानियों ने देखा कि छोटी बहू सबसे सम्पन्न हो गई है तो उनके मन में ईर्ष्या जागी। उन्होंने सोचा — इसका व्रत भंग करना होगा।
एक शुक्रवार को बड़ी जेठानी ने चुपके से छोटी बहू के भोजन में नींबू का रस और इमली मिला दी। छोटी बहू ने अनजाने में खट्टा भोजन खा लिया।
उसी रात से सब उलटा होने लगा। पति का व्यापार डूब गया, घर में कलह शुरू हो गई, धन का नाश होने लगा। छोटी बहू बहुत दुःखी हुई।
रात को संतोषी माता ने स्वप्न में आकर कहा — "बेटी! तेरी जेठानियों ने तेरे भोजन में खट्टा मिलाया था। तेरा व्रत भंग हो गया। तू फिर से सोलह शुक्रवार का व्रत आरम्भ कर। इस बार सावधान रहना।"
छोटी बहू ने पुनः व्रत आरम्भ किया। इस बार वह स्वयं अपना भोजन बनाती और किसी को हाथ नहीं लगाने देती। सोलह शुक्रवार पूरे होने पर उसने विधिपूर्वक उद्यापन किया — आठ लड़कों को गुड़-चने का भोजन कराया।
संतोषी माता अत्यन्त प्रसन्न हुईं। उनकी कृपा से पति लौट आया, व्यापार दुगुना फला-फूला, घर में सुख-समृद्धि छा गई। बड़ी जेठानियों को भी उनकी करनी का फल मिला — उनके घरों में अशांति और हानि हुई। बाद में उन्होंने भी पश्चाताप किया और संतोषी माता का व्रत किया तो उनके घर भी सुधर गए।
तभी से स्त्रियाँ सोलह शुक्रवार का व्रत रखकर संतोषी माता को गुड़-चने का भोग लगाती हैं और मनोकामना पूर्ण होने पर उद्यापन करती हैं।
॥ व्रत विधि ॥
सोलह शुक्रवार तक व्रत रखें।
प्रातःकाल स्नान करके संतोषी माता का पूजन करें।
गुड़ और चना प्रसाद के रूप में चढ़ाएँ।
व्रत वाले दिन खट्टी वस्तु बिलकुल न खाएँ।
कथा सुनें और प्रसाद बाँटें।
उद्यापन में आठ लड़कों को भोजन कराएँ।
॥ इति श्री संतोषी माता व्रत कथा सम्पूर्णा ॥
Benefits (फल)
- ★Fulfills all wishes when 16 Fridays are observed with devotion
- ★Brings prosperity, wealth and abundance to the household
- ★Grants family harmony and resolves domestic conflicts
- ★Santoshi Mata is especially gracious to devoted women
- ★Simple vrat vidhi — offer jaggery and chana, avoid sour foods on Friday
- ★Listening to the katha is an essential part of the Friday vrat
