Vaishno Devi Chalisa
वैष्णो देवी चालीसा
About Vaishno Devi Chalisa
Dedicated to Goddess Durga, the Vaishno Devi Chalisa (वैष्णो देवी चालीसा) is a sacred 40-verse devotional hymn revered in Hindu tradition. Attributed to Traditional, this prayer holds a special place in Hindu devotional literature. Chanting this stotra with devotion is said to remove all sorrows, diseases, and afflictions as well as fulfill all wishes of those who visit or pray to Vaishno Devi. Additionally, it is known to grant wealth, knowledge, and protection simultaneously. For best results, devotees chant this on Tuesday (Mangalvar) and Friday (Shukravar) and during Navratri and Vaishno Devi Yatra. Comprising 40 verses, it can be completed in approximately 15 minutes, making it suitable for daily devotional practice. On this page, you can read the complete Vaishno Devi Chalisa in Devanagari Sanskrit with English transliteration, Hindi meaning (arth), and free PDF download for offline recitation.
Reviewed & translated by Acharya Pushyadant Mishra
Stotra Path (स्तोत्र पाठ)
॥ श्री वैष्णो देवी चालीसा ॥
॥ दोहा ॥
जगजननी जगदम्बा भवानी।
सबसे पहले तेरी मैं कहानी॥
नमो नमो वैष्णो माता।
मेरी सुनो विनय सुखदाता॥
॥ चौपाई ॥
त्रिकूट पर्वत पर है डेरा।
तीनों रूपों का भव्य बसेरा॥
महाकाली महालक्ष्मी ज्ञानी।
महासरस्वती तीनों भवानी॥
जय जय अम्बे जय वैष्णवी।
जय जय माता जय जग ईश्वरी॥
दरबार तेरा अति भव्य है।
त्रिकूट पर्वत पर सब कव्य है॥
बाणगंगा का जल निर्मल।
चरणगंगा में पाप हरत जल॥
अद्भुत गुफा में तेरा निवास।
पिण्ड रूप तू पूर्ण प्रकाश॥
भैरों को तूने दिया मार।
भैरो का शीश गिरा दरबार॥
दुर्गम मार्ग पर चलते जाना।
श्रद्धा भक्ति से दर्शन पाना॥
जो कोई जाए तेरे द्वार।
उसका होता बेड़ा पार॥
धनी और निर्धन सब आते।
सबकी मनोकामना पूरी पाते॥
घंटे की ध्वनि सब दिन होती।
जय जय माता जग को जोती॥
कटरा शहर में तेरा धाम।
सब भक्तों को मिलता आराम॥
मैया तेरी सदा ही जय हो।
जो आए शरण सदा सुख पावे॥
त्रिकूट पर पिण्डी को पूजें।
जिससे सब दुख दूर हो भूलें॥
महालक्ष्मी का दर्शन पाये।
धन ऐश्वर्य भरपूर हो जाये॥
महाकाली का रूप निराला।
शत्रु विनाशे हर मतवाला॥
महासरस्वती शुभ वरदानी।
विद्या ज्ञान प्रदायिनी भवानी॥
सुख सम्पत्ति सब विधि पाओ।
संतान सुख भी अधिक पाओ॥
रोग शोक संताप नशावो।
मैया से सब सुख तुम पाओ॥
जय वैष्णो माता मैया।
तू है सबकी सुख दैया॥
तू है पापों को हरने वाली।
तू है दुष्टों को मारने वाली॥
हम सब उतरे तेरे द्वारे।
मैया दुख हमारे सब टारे॥
चालीसा वैष्णवी का गायें।
सुख और शान्ति अपार पायें॥
पढ़े सुने जो नर और नारी।
उन पर कृपा करे महतारी॥
पुत्र और धन धान्य जो चाहे।
वो अम्बे तेरे गुण सब गाहे॥
मन से ध्यान लगा कर तेरा।
पाए शरण जगत में तेरा॥
सदा सुखी रहता वह प्राणी।
जो करता रहे तेरी बखानी॥
सतयुग में सती कहलाई।
त्रेता में तू राम दुलाई॥
द्वापर में तू कृष्ण की शक्ति।
कलयुग में वैष्णवी हो भक्ति॥
॥ दोहा ॥
जय जय वैष्णो माता जग की सुखदाता।
चालीसा जो गाये नित वो सुख को पाता॥
सब दुख हरे मैया वैष्णवी विचार।
भक्तों को दे माता सब सुख अपार॥
Benefits (फल)
- ★Invokes the triple form of Vaishno Devi - Mahakali, Mahalakshmi, Mahasaraswati
- ★Fulfills all wishes of those who visit or pray to Vaishno Devi
- ★Grants wealth, knowledge, and protection simultaneously
- ★Removes all sorrows, diseases, and afflictions
- ★Blesses with children, prosperity, and family happiness
- ★Extremely popular prayer for Vaishno Devi pilgrimage
