Shraddha Mantras
श्राद्ध मन्त्र
About Shraddha Mantras
The Shraddha Mantras, known in Sanskrit as श्राद्ध मन्त्र, is a sacred prayer in praise of Lord Vishnu. This revered text originates from Grihya Sutras, Garuda Purana, Vayu Purana. Chanting this stotra with devotion is said to contain authentic Pindadana mantra from Vedic tradition as well as bring peace to departed souls and prosperity to the living family. Additionally, it is known to complete mantra collection for performing Shraddha (ancestral rites) and Pitru Tarpana. This sacred text is ideally recited on Saturday (Shanivar) and during Pitru Paksha for enhanced blessings. At 18 verses long, the recitation takes roughly 12 minutes, making it accessible for regular devotional use. On this page, you can read the complete Shraddha Mantras in Devanagari Sanskrit with English transliteration, Hindi meaning (arth), and free PDF download for offline recitation.
Reviewed & translated by Acharya Pushyadant Mishra
Stotra Path (स्तोत्र पाठ)
॥ श्री श्राद्ध मन्त्र संग्रह ॥
॥ पितृ तर्पण एवं श्राद्ध विधि ॥
॥ गणेश वन्दना ॥
ॐ गं गणपतये नमः।
॥ पितृ ध्यान मन्त्र ॥
ॐ पितृभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः।
पितामहेभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः।
प्रपितामहेभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः॥
पिता, पितामह (दादा), प्रपितामह (परदादा) — तीनों पीढ़ियों के पितरों को स्वधा (श्रद्धापूर्वक) नमस्कार।
॥ संकल्प मन्त्र ॥
ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः। ॐ तत्सत्।
अमुकगोत्रस्य अमुकशर्मणः पितुः/मातुः
वार्षिकश्राद्धं/तिथिश्राद्धं अहं करिष्ये।
तदंगभूत-पितृतर्पणं च करिष्ये।
॥ तिलतर्पण मन्त्र ॥
(दक्षिण दिशा की ओर मुख करके, यज्ञोपवीत अपसव्य — दाहिने कन्धे पर)
ॐ अमुकगोत्रान् अमुकशर्मणः पितॄन् स्वधा नमः तर्पयामि।
ॐ अमुकगोत्रान् अमुकशर्मणः पितामहान् स्वधा नमः तर्पयामि।
ॐ अमुकगोत्रान् अमुकशर्मणः प्रपितामहान् स्वधा नमः तर्पयामि।
(तिल-जल-अक्षत मिलाकर तीन-तीन अञ्जलि प्रत्येक पीढ़ी को)
॥ मातृ पक्ष तर्पण ॥
ॐ अमुकगोत्रान् अमुकनाम्नीम् मातरम् स्वधा नमः तर्पयामि।
ॐ अमुकगोत्रान् अमुकनाम्नीम् पितामहीम् स्वधा नमः तर्पयामि।
ॐ अमुकगोत्रान् अमुकनाम्नीम् प्रपितामहीम् स्वधा नमः तर्पयामि।
॥ पिण्डदान मन्त्र ॥
ॐ ये चेह पितरो ये च नेह यांश्च विद्म यांश्चु न प्रविद्म।
त्वं वेत्थ यति ते जातवेदः ताभ्यः स्वधा अनु ये तृप्यन्तु॥
हे अग्निदेव! जो पितर यहाँ हैं और जो नहीं हैं, जिन्हें हम जानते हैं और जिन्हें नहीं जानते — आप जानते हैं कि वे कितने हैं। उन सबको स्वधा से तृप्त करें।
(चावल, तिल, जौ का पिण्ड बनाकर कुश पर रखें)
॥ विष्णु पितृ मन्त्र ॥
ॐ नमो वः पितरो रसाय
नमो वः पितरः शोषाय
नमो वः पितरो जीवाय
नमो वः पितरः स्वधायै
नमो वः पितरो मन्यवे
नमो वः पितरो घोराय॥
हे पितरो! रस को नमस्कार, शोष को नमस्कार, जीवन को नमस्कार, स्वधा को नमस्कार, मन्यु को नमस्कार, घोर को नमस्कार।
॥ पितृ गायत्री मन्त्र ॥
ॐ पितृभ्यो विद्महे जगतपालकेभ्यो धीमहि।
तन्नः पितरः प्रचोदयात्॥
॥ श्राद्ध भोजन मन्त्र ॥
ॐ अन्नं न परित्यक्तव्यम्। तद्व्रतम्।
आपो वा अन्नम्। ज्योतिर्वा अन्नम्।
ॐ अन्नपतेऽन्नस्य नो देह्यनमीवस्य शुष्मिणः।
प्र प्रदातारं तारिषत् ऊर्जं नो धेहि द्विपदे चतुष्पदे॥
(ब्राह्मण भोजन कराकर दक्षिणा दें — वस्त्र, अन्न, धन सहित)
॥ पितृ विसर्जन मन्त्र ॥
ॐ ऊर्जं वहन्तीरमृतं घृतं पयः
कीलालं परिस्रुतम्।
स्वधा स्थ तर्पयत मे पितॄन्॥
हे अमृत, घृत, दुग्ध, मधु को वहन करने वाली (आहुतियाँ)! आप स्वधा हैं — मेरे पितरों को तृप्त करें।
त्रिपदे पूर्णं पात्रमानयत पिण्डान् निर्वपत।
पितरः सम्प्रीयन्तां। गच्छध्वं पितरः स्वधां भक्तवन्तः॥
हे पितरो! स्वधा भोग करके प्रसन्न हों, तृप्त हों, कल्याण मार्ग पर जायें।
॥ श्राद्ध सम्पन्न प्रार्थना ॥
ॐ मधु वाता ऋतायते मधु क्षरन्ति सिन्धवः।
माध्वीर्नः सन्त्वोषधीः॥
पितरों को नमस्कार। उनकी कृपा से कुल में सुख-शान्ति-समृद्धि बनी रहे। पितृ ऋण से मुक्ति हो।
॥ इति श्री श्राद्ध मन्त्र संग्रह सम्पूर्ण ॥
Benefits (फल)
- ★Complete mantra collection for performing Shraddha (ancestral rites) and Pitru Tarpana
- ★Liberates ancestors and frees the performer from Pitru Dosha
- ★Includes tarpana mantras for paternal and maternal lineages (three generations each)
- ★Contains authentic Pindadana mantra from Vedic tradition
- ★Essential for Pitru Paksha, annual death anniversary (tithi), and Amavasya shraddha
- ★Brings peace to departed souls and prosperity to the living family
