Surya Chalisa
सूर्य चालीसा
About Surya Chalisa
Surya Chalisa — सूर्य चालीसा — is a sacred 40-verse devotional hymn offered to Sun God Surya. Attributed to Traditional Hindu Prayer, this prayer holds a special place in Hindu devotional literature. Devotees recite this prayer to cure eye diseases and all physical ailments and grant victory and prosperity in life. It is also said to destroy sins accumulated over seven lifetimes. Recitation is particularly auspicious on Sunday (Ravivar) and during Makar Sankranti. With 40 verses and a reading time of about 12 minutes, this prayer is ideal for both daily worship and special occasions. On this page, you can read the complete Surya Chalisa in Devanagari Sanskrit with English transliteration, Hindi meaning (arth), and free PDF download for offline recitation.
Reviewed & translated by Acharya Pushyadant Mishra
Stotra Path (स्तोत्र पाठ)
॥ श्री सूर्य चालीसा ॥
॥ दोहा ॥
कनक बदन कुण्डल मकर, मुकुट किरीट विराज।
दिव्य दृष्टि अरुणो ज्योति, भानु शंख चक्र गदा विराज॥
॥ चौपाई ॥
जय जय जय रवि देव दयाला।
करत सदा भक्तन प्रतिपाला॥
अरुण जुता रथ सात घोड़ा।
तीनों लोक करत हैं दौड़ा॥
गंगा यमुना गोदावरी।
सरस्वती ये धाराधरी॥
मकर राशि में जब रवि आवे।
सब पुण्य तीरथ तब हो जावे॥
द्वादश रूप धरे रवि देवा।
अरुणतेज करे सब सेवा॥
इन्द्र चन्द्र यम वरुण कुबेरा।
शनि बुध शुक्र गुरू सब तेरा॥
लंकापति निशिचर जब आयो।
तब प्रभु रामहिं मन्त्र बतायो॥
आदित्य हृदय जो कोई गावे।
रिपु पर जय सुख सम्पद पावे॥
ग्रह बृहस्पति शनि जब आवें।
तब तू भक्तन को बचावें॥
राम कृष्ण रूप तू धारी।
कृपा कर प्रभु भक्त सुखारी॥
गायत्री मन्त्र जो जपावे।
मन वांछित फल सोई पावे॥
तीनों लोक तिमिर जब छावे।
तब तेरी ज्योति अँधेर मिटावे॥
भोर होत कमल सब फूले।
तेरे तेज से कली न भूले॥
कमल नयन मधुर मुस्कावे।
अरुण प्रकाश धरा पर आवे॥
तेरे तेज बिना सब सूना।
ज्ञान नयन सब रहत अजूना॥
सूर्य किरण जो पानी पावे।
गंगा जमुन ते पावन हो जावे॥
सब ग्रह तव आज्ञाकारी।
करत सदा तव चाकरी सारी॥
चन्द्रमा ज्योति तेरे तेज से।
तारे जगमग होत सुवेश से॥
उत्तर दक्षिण अयन तेरा।
ऋतु वसन्त ग्रीष्म रवि मेरा॥
जो जन शनिवार व्रत पावे।
रोग दोष तन सब मिट जावे॥
सूर्य ग्रहण जब होत जगत में।
तब तू छिपत न दिखत रत में॥
सहस्र नाम तेरे गुण गावें।
भानु तेज सबही मन भावें॥
सब जीवन के पालनहारी।
भवसागर से करो उबारी॥
मकर संक्रान्ति पर्व तुम्हारा।
पूजें सब संसार तुम्हारा॥
छठ पूजा में सबसे पहले।
तुमको अर्घ्य चढ़ावें सहले॥
रथ सप्तमी पर्व अति प्यारा।
करत सदा तव ध्यान हमारा॥
गंगा यमुना सरयू नर्मदा।
सब पावन तेरी किरणों से सदा॥
जो नित प्रति सूर्य चालीसा गावे।
सो सात जनम का पाप नसावे॥
रोग शोक दरिद्र मिट जावे।
मन वांछित फल सो जन पावे॥
प्रातः काल उठ जो यह पढ़ई।
ताके सब सुख सम्पत्ति बढ़ई॥
सब विघ्न ताके मिट जावें।
मनोवांछित फल सो सब पावें॥
जन्म जन्म का दुख सब नासे।
नित्य पाठ करे मन उल्लासे॥
सूर्य चालीसा जो पढ़े सुनावे।
सो भवसागर पार तर जावे॥
नेत्र रोग हरे सब पीरा।
पाठ करे सो पावे धीरा॥
सब कामना हृदय की पूरे।
दूर करे सब संकट क्रूरे॥
ताप तीनों सब मिट जावें।
सूर्य देव की शरण जो आवें॥
कर जोरि विनय जो आवे।
सो जन मनवांछित फल पावे॥
कर जोरि प्रभु पद पर माथा।
सदा रहे प्रभु जन के साथा॥
॥ दोहा ॥
पाठ करे चालीसा जो, भानु देव मतिमान।
ताकी सदा विजय रहे, मिटें सकल दुख हान॥
॥ इति श्री सूर्य चालीसा सम्पूर्ण ॥
Benefits (फल)
- ★Destroys sins accumulated over seven lifetimes
- ★Cures eye diseases and all physical ailments
- ★Removes poverty, grief, and suffering
- ★Fulfills all desires of the heart
- ★Grants victory and prosperity in life
- ★Protects from planetary afflictions
