Durga Chalisa
दुर्गा चालीसा
About Durga Chalisa
Durga Chalisa — दुर्गा चालीसा — is a sacred 40-verse devotional hymn offered to Goddess Durga. This revered text originates from Traditional. Devotees recite this prayer to remove diseases and grant good health and bestow both worldly pleasures and ultimate liberation. It is also said to grant the blessings of all nine forms of Durga. This sacred text is ideally recited on Tuesday (Mangalvar) and Friday (Shukravar) and during Navratri for enhanced blessings. At 40 verses long, the recitation takes roughly 15 minutes, making it accessible for regular devotional use. On this page, you can read the complete Durga Chalisa in Devanagari Sanskrit with English transliteration, Hindi meaning (arth), and free PDF download for offline recitation.
Reviewed & translated by Acharya Pushyadant Mishra
Stotra Path (स्तोत्र पाठ)
॥ दोहा ॥
नमो नमो दुर्गे सुख करनी।
नमो नमो अम्बे दुःख हरनी॥
॥ चौपाई ॥
निरंकार है ज्योति तुम्हारी।
तिहूँ लोक फैली उजियारी॥
शशि ललाट मुख महाविशाला।
नेत्र लाल भृकुटी विकराला॥
रूप मातु को अधिक सुहावे।
दरश करत जन अति सुख पावे॥
तुम संसार शक्ति लय कीना।
तिहूँ लोक में बल न तीना॥
प्रतिपालक संहारकर्त्री।
तुम सम्पत्ति की अधिकारिणी॥
सृष्टिरूप तुमने ही धारा।
पालन हेतु अन्नपूर्णा नारा॥
संहार काल में महाकाली।
रूद्र शक्ति सदा विश्वपाली॥
काम क्रोध मद मोह नशावो।
सन्तुष्ट होय मैया सुख पावो॥
दुष्ट दैत्य मदमान बनायो।
तनिक वो सबका बल घटायो॥
सुम्भ निसुम्भ विदारे गाढ़ा।
महिषासुर को दलन उपाड़ा॥
रक्तबीज शंकर को मारा।
मुण्ड दैत्य सिर विदारा॥
ब्रह्माणी रुद्राणी तुम कामा।
वैष्णवी शक्ति बड़ी अभिरामा॥
चामुण्डा अरु चण्डिका बोलैं।
भक्तन सदा शक्ति वर खोलैं॥
राजराजेश्वरी तुम्हीं कहाई।
शिव की प्रिया सदा सुखदाई॥
षोडश भुजा बाहु तुम धारीं।
त्रिशूल खड्ग खप्पर वारीं॥
सज्जे शंख बान धनुधारी।
श्री कृपाण एक हस्त प्यारी॥
देखि रूप मोहित महादेवा।
ज्ञानी ध्यान धरत मन भेदा॥
मन वच क्रम करि सेवा।
त्रिभुवन माता सबसे नेहा॥
रोगन से तुम रक्षा करनी।
अरि से बचन करो महारानी॥
नवरात्र पूजा में सुनावत।
ता दिन सुख का अंत न आवत॥
भक्ति मातु की करो हमारी।
विपदा हरो देवी महारानी॥
सब मिलि करो वन्दना माई।
संकट कटे न लागे ताई॥
मातु मंगल ज्योति जगाओ।
नवदुर्गा के गुण सुनाओ॥
श्री दुर्गा जी की आरती गावत।
कठिन कष्ट तब ही मन भावत॥
भक्ति करो जी शब्द हमारा।
फिर करो मातु कृपा अपारा॥
नवरात्रों में पूजन कीजै।
षटमासी में भी मन दीजै॥
संकट हरो सबकी माई।
कृपा करो महारानी दाई॥
॥ दोहा ॥
दुर्गा चालीसा जो कोई गावे।
सब सुख भोग परमपद पावे॥
देवी दयालु कृपा जो करही।
पूर्ण आस मन की वो भरही॥
Benefits (फल)
- ★Provides divine protection from all enemies and evil forces
- ★Destroys all fears and grants courage
- ★Removes diseases and grants good health
- ★Fulfills all wishes when recited during Navratri
- ★Grants the blessings of all nine forms of Durga
- ★Bestows both worldly pleasures and ultimate liberation
