Shree Ganesha — lord of beginnings and remover of obstaclesShree Ganeshawednesday

Vinayaka Chaturthi Vrat Katha

विनायक चतुर्थी व्रत कथा

15 min read18 versesSource: Traditional

About Vinayaka Chaturthi Vrat Katha

Vinayaka Chaturthi Vrat Katha (विनायक चतुर्थी व्रत कथा) is a sacred prayer dedicated to Lord Ganesha. This revered text originates from Traditional. Chanting this stotra with devotion is said to remove all obstacles when observed with devotion as well as ensure Ganesha's blessings for the entire year. Additionally, it is known to include the powerful twelve names of Ganesha. For best results, devotees chant this on Wednesday (Budhvar) and during Ganesh Chaturthi. Comprising 6 verses, it can be completed in approximately 10 minutes, making it suitable for daily devotional practice. On this page, you can read the complete Vinayaka Chaturthi Vrat Katha in Devanagari Sanskrit with English transliteration, Hindi meaning (arth), and free PDF download for offline recitation.

Reviewed & translated by Acharya Pushyadant Mishra

Stotra Path (स्तोत्र पाठ)

॥ श्री विनायक चतुर्थी व्रत कथा ॥

ॐ श्री गणेशाय नमः।

॥ पूजा मन्त्र ॥

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ।

निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

॥ कथा ॥

बहुत प्राचीन काल की बात है। कैलास पर्वत पर भगवान शिव और माता पार्वती का निवास था। एक दिवस भगवान शिव तपस्या के लिए बाहर गए हुए थे। माता पार्वती स्नान करना चाहती थीं, किन्तु द्वार पर कोई पहरेदार नहीं था।

तब माता पार्वती ने अपने शरीर पर लगे हल्दी के उबटन से एक अत्यन्त सुन्दर बालक की मूर्ति बनाई। उन्होंने उस मूर्ति में अपनी दिव्य शक्ति से प्राण डाल दिए। बालक जीवित हो उठा। उसका मुख तेजस्वी था, शरीर बलिष्ठ था। माता पार्वती ने उसे गले लगाया और कहा — "तुम मेरे पुत्र हो। आज से तुम मेरी आज्ञा का पालन करोगे।"

माता ने बालक को एक दण्ड दिया और कहा — "पुत्र! तुम इस द्वार पर खड़े रहो। जब तक मैं स्नान कर रही हूँ, किसी को भी भीतर मत आने देना।" बालक ने कहा — "जैसी आपकी आज्ञा, माँ।"

कुछ समय पश्चात् भगवान शिव तपस्या से लौटे। उन्होंने भवन में प्रवेश करना चाहा, किन्तु द्वार पर एक अनजान बालक ने उन्हें रोक दिया। बालक ने कहा — "आप भीतर नहीं जा सकते। माता ने मुझे आज्ञा दी है कि किसी को भी भीतर न जाने दूँ।"

भगवान शिव ने कहा — "बालक! यह मेरा ही भवन है। मैं पार्वती का पति शिव हूँ।" किन्तु बालक टस से मस नहीं हुआ। उसने कहा — "मैं केवल माता की आज्ञा जानता हूँ। आपको रुकना होगा।"

इस पर भगवान शिव को बहुत क्रोध आया। उन्होंने अपने गणों को बालक से युद्ध करने भेजा, किन्तु बालक ने अकेले ही सबको परास्त कर दिया। अन्त में भगवान शिव ने क्रोध में आकर अपने त्रिशूल से बालक का शिर काट दिया।

जब माता पार्वती बाहर आईं और अपने पुत्र को मृत देखा तो वे अत्यन्त दुःखी और क्रोधित हुईं। उनका विलाप सुनकर तीनों लोक काँपने लगे। माता ने कहा — "यह मेरा पुत्र था! तुमने मेरे पुत्र की हत्या कर दी! यदि मेरे पुत्र को जीवित नहीं किया गया तो मैं प्रलय कर दूँगी।"

भगवान शिव को बहुत पश्चाताप हुआ। उन्होंने अपने गणों को आदेश दिया — "जाओ, उत्तर दिशा में जो सबसे पहला प्राणी मिले, उसका शीश लेकर आओ।" गण उत्तर दिशा में गए और सबसे पहले उन्हें एक हाथी का बच्चा मिला। उन्होंने उसका शीश लाकर भगवान शिव को दिया।

भगवान शिव ने उस गज के शीश को बालक के धड़ पर लगाया और उसमें प्राण डाल दिए। बालक पुनः जीवित हो उठा। माता पार्वती प्रसन्न हुईं। भगवान शिव ने बालक को गले लगाया और कहा — "आज से तुम्हारा नाम गणेश होगा। तुम मेरे सभी गणों के अधिपति होगे।"

तभी सभी देवताओं ने मिलकर घोषणा की — "आज से किसी भी शुभ कार्य, पूजा या अनुष्ठान में सबसे पहले गणेश की पूजा होगी। जो गणेश की पूजा किए बिना कोई कार्य आरम्भ करेगा, उसे सफलता नहीं मिलेगी।"

भगवान शिव ने वरदान दिया — "भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को जो कोई श्रद्धापूर्वक गणेश की पूजा करेगा, उसके सभी विघ्न दूर होंगे।" तभी से चतुर्थी को गणेश पूजन और व्रत का विधान प्रचलित हुआ।

॥ व्रत विधि ॥

भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को प्रातःकाल स्नान करके गणेशजी की मूर्ति स्थापित करें।

षोडशोपचार पूजा करें।

२१ मोदक और दूर्वा अर्पित करें।

कथा श्रवण करें।

॥ पूजा श्लोक ॥

सुमुखश्चैकदन्तश्च कपिलो गजकर्णकः।

लम्बोदरश्च विकटो विघ्ननाशो गणाधिपः॥

धूम्रकेतुर्गणाध्यक्षो भालचन्द्रो गजाननः।

द्वादशैतानि नामानि यः पठेच्छृणुयादपि।

विद्यारम्भे विवाहे च प्रवेशे निर्गमे तथा।

संग्रामे संकटे चैव विघ्नस्तस्य न जायते॥

॥ इति श्री विनायक चतुर्थी व्रत कथा सम्पूर्णा ॥

Benefits (फल)

  • Complete Ganesh Chaturthi vrat katha with puja vidhi
  • Removes all obstacles when observed with devotion
  • Grants success in education, marriage and all endeavors
  • Includes the powerful twelve names of Ganesha
  • Ensures Ganesha's blessings for the entire year

Frequently Asked Questions

Common questions about Vinayaka Chaturthi Vrat Katha

Read Vinayaka Chaturthi Vrat Katha in Hindi with puja vidhi and mantras. Complete Ganesh Chaturthi story for obstacle removal and success. It is dedicated to Shree Ganesha (श्री गणेश), lord of beginnings and remover of obstacles. worshipped first before any auspicious activity. This sacred hymn contains 18 verses and is sourced from Traditional.