Hanuman Ashtak
हनुमान अष्टक
About Hanuman Ashtak
Among the most cherished prayers to Lord Hanuman, Hanuman Ashtak (हनुमान अष्टक) stands as a sacred prayer. This revered text originates from Traditional - Tulsidas. Devotees recite this prayer to remove all types of troubles and hardships and grant divine protection from negative forces. It is also said to cure chronic and difficult diseases. For best results, devotees chant this on Tuesday (Mangalvar) and Saturday (Shanivar) and during Hanuman Jayanti. With 8 verses and a reading time of about 12 minutes, this prayer is ideal for both daily worship and special occasions. On this page, you can read the complete Hanuman Ashtak in Devanagari Sanskrit with English transliteration, Hindi meaning (arth), and free PDF download for offline recitation.
Reviewed & translated by Acharya Pushyadant Mishra
Stotra Path (स्तोत्र पाठ)
॥ श्री हनुमान अष्टक ॥
बाल समय रबि भक्षि लियो तब,
तीनहुँ लोक भयो अँधियारो।
ताहि सों त्रास भयो जग को,
यह संकट काहु सों जात न टारो॥
देवन आनि करी बिनती तब,
छाँड़ि दियो रबि कष्ट निवारो।
को नहिं जानत है जग में कपि,
संकट मोचन नाम तिहारो॥१॥
बालि की त्रास कपीस बसै गिरि,
जात महाप्रभु पंथ निहारो।
चौंकि महामुनि साप दियो तब,
चाहिय कौन बिचार बिचारो॥
कैद्ध महाप्रभु सो दोउ लरै तब,
सुग्रीवहिं मरि कै निहारो।
है प्रभु दीन दयालु कृपालु कपि,
निकसि गयो मारो अहि मारो॥२॥
अंगद के संग लेन गए सिय,
खोज कपीस यह बैन उचारो।
जीवत ना बचिहौ हम सों जु,
बिना सुधि लाये इहाँ पगु धारो॥
हेरि थके तट सिंधु सबे तब,
सीता सुधि कोउ न पारो।
जानि कहाँ तजि प्रान कहे सब,
बीर बजरंग बीर न हारो॥३॥
राम बिरह मकरंद कहँ रे,
मधुकर भानु मास गए कारो।
तापस बंध छुड़ाय सब ऋषिन,
ताहि देखाय सिया महतारो॥
चाहत सीय असोक बाटिका,
गीध सबै जाय के मारो।
सीता की सुधि राम को दीन्हीं,
बजरंगी बिरद सँभारो॥४॥
रावन त्रास दई सिय को सब,
राक्षसिन सों कही सोक निवारो।
ताहि समय हनुमान महाप्रभु,
जाय महा रजनीचर मारो॥
चहुँ दिसि फिरि बज्र की छाया,
तापह ताहि मरो जिम तारो।
दे असिका रघुनाथ पठाए,
बजरंगी बहु बैरिहि मारो॥५॥
बान लग्यो उर लछिमन के तब,
प्रान तजे सुत रावन मारो।
लै गृह बैद्य सुषेन समेत,
तबै गिरि लंका में डारो॥
आनि संजीवन हाथ दई तब,
लछिमन के तुम प्रान उबारो।
को नहिं जानत है जग में कपि,
संकट मोचन नाम तिहारो॥६॥
रावन जुद्ध अजान कियो तब,
नाग की फाँसी में सबको मारो।
श्रीरघुनाथ समेत सबै दल,
मोह भयो यह संकट भारो॥
आनि खगेस तबै हनुमान जू,
बंधन काटि सुत्रास निवारो।
को नहिं जानत है जग में कपि,
संकट मोचन नाम तिहारो॥७॥
बंधु समेत जबै अहिरावन,
लै रघुनाथ पाताल सिधारो।
देबिहिं पूजि भली बिधि सों बलि,
देउ सबै मिलि मंत्र बिचारो॥
जाय सहाय भयो तब ही,
अहिरावन सैन्य समेत संहारो।
को नहिं जानत है जग में कपि,
संकट मोचन नाम तिहारो॥८॥
॥ दोहा ॥
लाल देह लाली लसे, अरु धरि लाल लँगूर।
बज्र देह दानव दलन, जय जय जय कपि सूर॥
Benefits (फल)
- ★Removes all types of troubles and hardships
- ★Grants divine protection from negative forces
- ★Bestows courage and fearlessness
- ★Fulfills all righteous desires
- ★Cures chronic and difficult diseases
- ★Brings victory in difficult situations
