Karva Chauth Vrat Katha
करवा चौथ व्रत कथा
About Karva Chauth Vrat Katha
Karva Chauth Vrat Katha (करवा चौथ व्रत कथा) is a sacred prayer dedicated to Goddess Parvati. Attributed to Hindu Vrat Katha Tradition (Puranic), this prayer holds a special place in Hindu devotional literature. Devotees recite this prayer to nirjala (waterless) fast from sunrise to moonrise — supreme expression of marital love and invoke the blessings of Shiva-Parvati — the ideal divine couple. It is also said to strengthen the bond between husband and wife through divine grace. Recitation is particularly auspicious during Karva Chauth. With 20 verses and a reading time of about 10 minutes, this prayer is ideal for both daily worship and special occasions. On this page, you can read the complete Karva Chauth Vrat Katha in Devanagari Sanskrit with English transliteration, Hindi meaning (arth), and free PDF download for offline recitation.
Reviewed & translated by Acharya Pushyadant Mishra
Stotra Path (स्तोत्र पाठ)
॥ श्री करवा चौथ व्रत कथा ॥
॥ करवा चौथ माहात्म्य ॥
कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को सुहागिन स्त्रियाँ अपने पति की दीर्घायु और सौभाग्य के लिये करवा चौथ का व्रत रखती हैं। यह व्रत निर्जला (बिना जल के) रखा जाता है और चन्द्रमा को अर्घ्य देकर तोड़ा जाता है।
॥ कथा — रानी वीरवती ॥
प्राचीन काल में एक राजा की सात पुत्र और एक पुत्री वीरवती थी। वीरवती अपने भाइयों को अत्यन्त प्रिय थी। वीरवती का विवाह एक योग्य राजकुमार से हुआ।
विवाह के बाद पहला करवा चौथ आया। वीरवती मायके में थी। उसने निर्जला व्रत रखा। दिन ढलते-ढलते उसे भूख-प्यास से बहुत कष्ट होने लगा। सातों भाइयों से उसकी दशा देखी नहीं गई।
भाइयों ने पीपल के पेड़ के पीछे दीपक रखकर चादर से ढक दिया और वीरवती से कहा — "देखो बहन, चन्द्रमा निकल आया है, अब व्रत खोल लो।"
वीरवती ने छलनी से उस दीपक को चन्द्रमा समझकर अर्घ्य दे दिया और भोजन कर लिया।
जैसे ही उसने पहला ग्रास मुँह में रखा — उसे पति की मृत्यु का समाचार मिला।
वीरवती विलाप करती हुई पति के पास गई। रास्ते में उसे एक वृद्धा मिली जो देवी माता की अनन्य भक्त थी। उसने वीरवती से कहा — "बेटी! तुमने करवा चौथ का व्रत छल से तोड़ा, इसलिए यह दुःख आया। अब तुम पूरे एक वर्ष सच्चे मन से प्रत्येक चतुर्थी को व्रत करो और विधिपूर्वक चन्द्रमा को अर्घ्य दो।"
वीरवती ने पूरे वर्ष श्रद्धापूर्वक प्रत्येक चतुर्थी को व्रत किया। उसकी भक्ति और तपस्या से यमराज प्रसन्न हुए और उसके पति को जीवनदान दिया।
तभी से सुहागिन स्त्रियाँ पूरी श्रद्धा और विधि से करवा चौथ का व्रत रखती हैं।
॥ दूसरी कथा — करवा की कथा ॥
एक करवा नाम की पतिव्रता स्त्री थी। एक बार उसका पति नदी में स्नान करते समय मगरमच्छ ने पकड़ लिया। करवा ने कच्चे धागे से मगरमच्छ को बाँध दिया और यमराज के पास जाकर बोली — "हे यमराज! मगरमच्छ को नरक में भेजो जिसने मेरे पति को पकड़ा।"
यमराज बोले — "यह मेरे अधिकार में नहीं।"
करवा बोली — "यदि आपने मेरी बात नहीं मानी तो मैं आपको श्राप दूँगी। मेरे सतीत्व के तप की शक्ति से मैं ऐसा कर सकती हूँ।"
यमराज करवा के पातिव्रत्य तेज से भयभीत हुए और मगरमच्छ को नरक में भेज दिया। करवा का पति सकुशल लौट आया।
करवा के नाम से ही यह व्रत 'करवा चौथ' कहलाया।
॥ करवा चौथ व्रत विधि ॥
कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को सूर्योदय से पहले स्नान, श्रृंगार करें।
संकल्प लें — पति की दीर्घायु, सौभाग्य और स्वास्थ्य के लिये।
निर्जला व्रत रखें — जल भी न पियें।
सन्ध्या काल में शिव-पार्वती, गणेश, कार्तिकेय, चन्द्रमा का पूजन करें।
करवा चौथ की कथा सुनें।
चन्द्रोदय पर छलनी से चन्द्रमा के दर्शन करें।
पति के चरण स्पर्श करें, पति छलनी से पत्नी का मुख देखें।
पति के हाथ से जल और प्रथम ग्रास ग्रहण कर व्रत तोड़ें।
॥ इति श्री करवा चौथ व्रत कथा सम्पूर्ण ॥
Benefits (फल)
- ★Most beloved Hindu vrat for married women — for husband's long life and prosperity
- ★Nirjala (waterless) fast from sunrise to moonrise — supreme expression of marital love
- ★Strengthens the bond between husband and wife through divine grace
- ★Invokes the blessings of Shiva-Parvati — the ideal divine couple
- ★Reading the katha is an essential part of the vrat vidhi
- ★Celebrated across North India with great devotion in Kartik month
