Saraswati Sahasranama Stotram
श्री सरस्वती सहस्रनाम स्तोत्रम्
About Saraswati Sahasranama Stotram
Among the most cherished prayers to Goddess Saraswati, Saraswati Sahasranama Stotram (श्री सरस्वती सहस्रनाम स्तोत्रम्) stands as a sacred recitation of 1000 divine names. Attributed to Skanda Purana, this prayer holds a special place in Hindu devotional literature. Regular recitation is believed to include the famous Ya Kundendu dhyana shloka for meditation, grant all forms of knowledge, education, and scholarship, and destroy ignorance, poverty, and all mental dullness. This prayer is traditionally recited on Thursday (Guruvar) and during Vasant Panchami and Navratri to invoke divine grace. The text contains 25 verses and takes around 25 minutes to recite, fitting conveniently into a daily spiritual routine. On this page, you can read the complete Saraswati Sahasranama Stotram in Devanagari Sanskrit with English transliteration, Hindi meaning (arth), and free PDF download for offline recitation.
Reviewed & translated by Acharya Pushyadant Mishra
Stotra Path (स्तोत्र पाठ)
॥ श्री सरस्वती सहस्रनाम स्तोत्रम् ॥
॥ ध्यानम् ॥
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।
या ब्रह्माच्युतशङ्करप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥
शुक्लां ब्रह्मविचारसारपरमामाद्यां जगद्व्यापिनीं
वीणापुस्तकधारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्।
हस्ते स्फाटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्॥
॥ अथ सहस्रनाम प्रारम्भः ॥
ॐ श्रीं सरस्वती वाग्देवी भारती शारदाम्बिका।
वेदगर्भा महाविद्या चतुर्वेदविशारदा॥१॥
ब्राह्मी ब्रह्मस्वरूपा च वाग्देवता मनोहरा।
सर्वशास्त्रमयी विद्या कामधेनुस्वरूपिणी॥२॥
वेदान्तवेद्या विमला विश्वरूपा विलासिनी।
कमला कमलासीना कामरूपा कलापिनी॥३॥
पुस्तकालोचनप्रीता सरस्वत्यम्बुजेक्षणा।
महावाणी सुवाणी च सर्ववाण्यधिदेवता॥४॥
सर्वविद्याप्रदा विद्या सर्वज्ञा ज्ञानदायिनी।
शुद्धा शुद्धस्वरूपा च शुद्धज्ञानस्वरूपिणी॥५॥
धरणी धारिणी ध्येया धर्मिणी धर्मवत्सला।
देवी दिव्या दयापूर्णा दारिद्र्यध्वंसकारिणी॥६॥
मोक्षदा मोहनाशी च मूलप्रकृतिरव्यया।
महेश्वरी मात्रा च मातृमण्डलवासिनी॥७॥
मन्त्रमाता मन्त्रगम्या मन्त्राणां परदेवता।
मधुरस्वरगाम्भीर्या मधुरालापशालिनी॥८॥
वीणापाणिर्वेदनुता विद्याधरसुपूजिता।
वामाचारप्रिया वामा वयोवृद्धसुखप्रदा॥९॥
वागीश्वरी विश्वमाता विश्वबीजा विभावरी।
वरदा वरिष्ठा च वरेण्या वरनायिका॥१०॥
त्रिकालज्ञा त्रयीमूर्तिस्त्रिपुरा त्रिदशेश्वरी।
त्रिगुणा त्रिगुणातीता त्रिलोकवशकारिणी॥११॥
महासरस्वती देवी महालक्ष्मी महेश्वरी।
सरस्वत्यष्टरूपा च अष्टबुद्धिप्रदायिनी॥१२॥
कला कलावती कान्ता कल्याणी कलनाशिनी।
कामदात्री कामरूपा कदम्बवनवासिनी॥१३॥
सर्वज्ञा सर्वगा साध्वी सर्वमङ्गलदायिनी।
सर्वार्थसाधनी सत्या सर्वसौभाग्यदायिनी॥१४॥
गायत्री गीतकी गोत्रा गणेशजननी गतिः।
गुणश्रेष्ठा गुणातीता गुह्या गन्धर्ववन्दिता॥१५॥
वेदविद्यामयी वेद्या विद्यारूपा विनोदिनी।
वैदेही विजया वन्द्या वालिकाव्रतधारिणी॥१६॥
हंसवाहना हंसगतिर्हंसरूपा हरिप्रिया।
हयग्रीवसुतोषिता हृदयग्रन्थिभेदिनी॥१७॥
सरोजनयना सर्वसाक्षिणी सर्वरूपिणी।
सच्चिदानन्दरूपा च सदा तुष्टा सदा शिवा॥१८॥
महानन्दप्रदा नित्या निर्मला नारदस्तुता।
पद्मासना पद्मनेत्रा पद्मा पद्मनिभानना॥१९॥
परमा पावनी पूज्या पापनाशनकारिणी।
परमेश्वरी परात्परा पराशक्तिस्वरूपिणी॥२०॥
नारायणी नादरूपा नामपारायणप्रिया।
निरञ्जना निराधारा निर्गुणा निरुपाधिका॥२१॥
श्रीविद्या श्रीमहाविद्या श्रीमती श्रीनिवासिनी।
श्रीयुक्ता श्रीमयी शान्ता श्रीधरानन्ददायिनी॥२२॥
वाग्देवी वाक्सरस्वती वाग्मयी वाणीश्वरी परा।
ज्ञानस्वरूपिणी ज्ञानगम्या ज्ञानवतां गतिः॥२३॥
तत्त्वासना तत्त्वमयी तत्त्वार्थस्वरूपिणी।
सामगानप्रिया सौम्या सारस्वतप्रदायिनी॥२४॥
अक्षराक्षरमालिन्यक्षसूत्रस्वरूपिणी।
वर्णमाला वर्णरूपा सर्ववर्णाधिदेवता॥२५॥
॥ फलश्रुति ॥
सरस्वतीसहस्रं तु नामानामुत्तमोत्तमम्।
यः पठेच्छृणुयाद्वापि तस्य वाणी प्रवर्तते॥
विद्या लभेत् कीर्तिं लभेत् सर्वत्र जयमश्नुते।
ब्रह्मलोकमवाप्नोति सरस्वत्याः प्रसादतः॥
॥ इति श्री सरस्वती सहस्रनाम स्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥
Benefits (फल)
- ★Contains 1000 sacred names of Goddess Saraswati with dhyana shlokas
- ★Bestows eloquence, mastery of speech, and divine Vani
- ★Grants all forms of knowledge, education, and scholarship
- ★Destroys ignorance, poverty, and all mental dullness
- ★Reading or hearing grants fame, victory, and entry to Brahmaloka
- ★Includes the famous Ya Kundendu dhyana shloka for meditation
