Sita Chalisa
सीता चालीसा
About Sita Chalisa
Sita Chalisa (सीता चालीसा) is a sacred 40-verse devotional hymn dedicated to Goddess Sita. This sacred composition is sourced from Traditional Chalisa Sangrah and continues to inspire devotees worldwide. Chanting this stotra with devotion is said to strengthen pativrata dharma and family values as well as bless with a harmonious and happy married life. Additionally, it is known to grant strength and patience during hardships. It is especially recommended on Friday (Shukravar) and during Sita Navami, Vivah Panchami, and Ram Navami for maximum spiritual benefit. At 42 verses long, the recitation takes roughly 14 minutes, making it accessible for regular devotional use. On this page, you can read the complete Sita Chalisa in Devanagari Sanskrit with English transliteration, Hindi meaning (arth), and free PDF download for offline recitation.
Reviewed & translated by Acharya Pushyadant Mishra
Stotra Path (स्तोत्र पाठ)
॥ दोहा ॥
जनक सुता जगदम्बिका, सीता चरन प्रणाम।
करहु कृपा जगदम्ब अब, पूरहु सकल मनोकाम॥
रघुपति प्रिया जानकी, तुम हो शक्ति अपार।
चालीसा तव गाइये, करहु सकल उपकार॥
॥ चौपाई ॥
जय सीता माता जगदम्बा।
जय जनक नन्दिनी सुख लम्बा॥
मिथिला नगरी में अवतारा।
जनक राय के घर सुखसारा॥
धरती से प्रकटी शुभ बेला।
जगत जननी का अद्भुत खेला॥
सुन्दर रूप मनोहर गाता।
त्रिलोक सौन्दर्य की ज्ञाता॥
बालपन में शिव धनु उठाया।
सकल जगत को विस्मय छाया॥
स्वयंवर में राम वर पाया।
शिव धनु तोड़ प्रभु ने हर्षाया॥
रघुकुल बहू बनी सुखदाई।
कौशल्या ससुरा सुख पाई॥
वन में गई प्रभु संग सुहानी।
सीता सती परम कल्याणी॥
पंचवटी में कुटी बनाई।
वन में लक्ष्मण संग रहि आई॥
सोने का मृग मन ललचाया।
मारीच ने छल रूप दिखाया॥
रावण ने छल से हर लीन्हा।
सीता ने लंका में दुख कीन्हा॥
अशोक वाटिका में बैठी।
राम विरह में दुखिया पैठी॥
त्रिजटा राक्षसी हित कीन्हा।
सीता को आश्वासन दीन्हा॥
हनुमत आये दर्श दिखाया।
प्रभु मुद्रिका सीता को लाया॥
चूड़ामणि प्रभु को पहुँचाई।
राम सेना ने लंका आई॥
रावण वध भई लंका जारी।
सीता मुक्त हुई सुखकारी॥
अग्नि परीक्षा दी सुखदानी।
पतिव्रता धर्म की रानी॥
अयोध्या में राज विराजे।
राम सीता के मंगल साजे॥
लव कुश पुत्र दो दीन्हे।
वाल्मीकि आश्रम में लीन्हे॥
धरती माता गोद में आई।
सीता माता स्वर्ग सिधाई॥
तव महिमा अगम अपारा।
वेद पुराण करें उच्चारा॥
पतिव्रता शिरोमणि माता।
सीता सम न कोई विख्याता॥
त्याग तपस्या की तुम मूरत।
सहनशीलता की तुम सूरत॥
नारी धर्म तुम्हीं से शोभे।
तुम्हरे गुण सब जगत को लोभे॥
जो सीता को ध्यान लगावे।
सो सब विपद विनाश करावे॥
गृहस्थ जीवन सुख से भरे।
सीता कृपा से दोष सब टरे॥
सन्तान सुख प्रदान करावें।
दम्पति जीवन मंगल भावें॥
सीता राम सदा मन ध्यावें।
जन्म जन्म के पाप नशावें॥
चालीसा सीता को गावे।
सो नित नित सुख सम्पत पावे॥
जो यह पाठ करे मन लाई।
सो सब कष्ट मिटावे भाई॥
॥ दोहा ॥
सीता चालीसा पढ़े, करे राम गुण गान।
सकल मनोरथ पूर्ण हों, मिले परम कल्यान॥
Benefits (फल)
- ★Blesses with a harmonious and happy married life
- ★Grants strength and patience during hardships
- ★Bestows progeny and family happiness
- ★Invokes the protective grace of Mother Sita
- ★Strengthens pativrata dharma and family values
