Somvar Vrat Katha (Monday Fasting Story)
सोमवार व्रत कथा
About Somvar Vrat Katha (Monday Fasting Story)
Dedicated to Lord Shiva, the Somvar Vrat Katha (Monday Fasting Story) (सोमवार व्रत कथा) is a sacred prayer revered in Hindu tradition. Attributed to Shiva Purana, this prayer holds a special place in Hindu devotional literature. Devotees recite this prayer to grant children, health, longevity, and prosperity and lead to Shivaloka through lifelong Monday fasting practice. This prayer is traditionally recited on Monday (Somvar) and during Maha Shivaratri and Shravan month to invoke divine grace. At 15 verses long, the recitation takes roughly 12 minutes, making it accessible for regular devotional use. On this page, you can read the complete Somvar Vrat Katha (Monday Fasting Story) in Devanagari Sanskrit with English transliteration, Hindi meaning (arth), and free PDF download for offline recitation.
Reviewed & translated by Acharya Pushyadant Mishra
Stotra Path (स्तोत्र पाठ)
॥ श्री सोमवार व्रत कथा ॥
ॐ नमः शिवाय॥
॥ व्रत विधि ॥
सोमवार का व्रत भगवान शिव को समर्पित है। श्रावण मास के सोमवार विशेष फलदायी हैं। प्रातः स्नान करके शिवलिंग पर जल, दूध, बिल्वपत्र चढ़ाएँ। एक समय भोजन करें। सायंकाल कथा सुनें।
॥ कथा ॥
एक समय की बात है, काशीपुरी में एक धनी साहूकार रहता था।
उसके यहाँ किसी वस्तु की कमी नहीं थी, परन्तु सन्तान न होने से
वह बहुत दुःखी था। पुत्र प्राप्ति के लिए वह प्रत्येक सोमवार को
शिवालय में जाकर भगवान शिव और पार्वती की पूजा करता था॥
एक दिन माता पार्वती ने भगवान शिव से कहा — हे नाथ!
इस साहूकार पर कृपा कीजिए। यह बड़ा भक्त है।
भगवान शिव बोले — हे पार्वती! इस संसार में सबको अपने
कर्मों का फल भोगना पड़ता है। किन्तु तुम्हारे कहने पर
मैं इसे पुत्र रत्न का वरदान देता हूँ,
किन्तु यह पुत्र केवल बारह वर्ष ही जीवित रहेगा॥
साहूकार ने यह वरदान सुन लिया। कालान्तर में उसके
एक सुन्दर पुत्र उत्पन्न हुआ। जब पुत्र ग्यारह वर्ष का हुआ,
तो उसे काशी पढ़ने भेजा गया।
साहूकार ने मामा को बुलाकर कहा कि इसे काशी ले जाओ
और मार्ग में यज्ञ कराते हुए जाना॥
मामा भानजे को लेकर काशी की ओर चले। मार्ग में एक नगर आया।
वहाँ के राजा की कन्या का विवाह हो रहा था। किन्तु वर काना था।
वर पक्ष वालों ने सोचा कि इस सुन्दर ब्राह्मण बालक को
विवाह मण्डप में बैठा दें, विवाह के बाद काने वर को भेज देंगे॥
ऐसा ही किया। किन्तु राजकन्या ने उस सुन्दर बालक के
गले में वरमाला डाल दी। इस प्रकार वह बालक विवाहित हो गया।
किन्तु उसने सत्य बता दिया और अपनी पत्नी को वहीं छोड़कर
मामा के साथ काशी चला गया॥
काशी पहुँचकर दोनों ने यज्ञ कराये। मामा-भानजे शिवालय में
नित्य पूजा करते। बारहवें वर्ष का अन्तिम दिन आया।
शिव कृपा से उस दिन भगवान शिव स्वयं प्रकट हुए।
बालक की भक्ति और सोमवार व्रत के प्रभाव से
भगवान शिव ने प्रसन्न होकर उसकी आयु बढ़ा दी
और दीर्घायु का वरदान दिया॥
साहूकार का पुत्र दीर्घायु होकर सुखपूर्वक जीवन व्यतीत करने लगा।
उसकी पत्नी भी उसके पास आ गई। दोनों ने आजीवन सोमवार
का व्रत किया और अन्त में शिवलोक को प्राप्त हुए॥
॥ कथा सार ॥
जो भक्त नियमपूर्वक सोलह सोमवार या श्रावण के सोमवार व्रत करता है,
भगवान शिव उस पर प्रसन्न होकर सभी मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं।
सन्तान, स्वास्थ्य, दीर्घायु और मोक्ष प्रदान करते हैं।
॥ आरती ॥
जय शिव ओंकारा, ॐ जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, अर्द्धाङ्गी धारा। ॐ जय शिव ओंकारा॥
॥ इति श्री सोमवार व्रत कथा सम्पूर्णा ॥
Benefits (फल)
- ★Traditional fasting story for Monday (Somvar) dedicated to Lord Shiva
- ★Observing 16 Mondays (Solah Somvar) vrat fulfills all wishes
- ★Grants children, health, longevity, and prosperity
- ★Especially powerful during Shravan (monsoon) month Mondays
- ★Listening to the Katha is integral part of the Somvar Vrat
- ★Leads to Shivaloka through lifelong Monday fasting practice
