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Ravivar Vrat Katha (Sunday Fasting Story)

रविवार व्रत कथा

10 min read14 versesSource: Surya Purana

About Ravivar Vrat Katha (Sunday Fasting Story)

Dedicated to Surya Dev, the Ravivar Vrat Katha (Sunday Fasting Story) (रविवार व्रत कथा) is a sacred prayer revered in Hindu tradition. Attributed to Surya Purana, this prayer holds a special place in Hindu devotional literature. Devotees recite this prayer to gain health, vitality, wealth, and prosperity through the blessings of the Sun God. This prayer is traditionally recited on Sunday (Ravivar) and during Makar Sankranti, Chhath Puja, and Ratha Saptami to invoke divine grace. At 14 verses long, the recitation takes roughly 10 minutes, making it accessible for regular devotional use. On this page, you can read the complete Ravivar Vrat Katha (Sunday Fasting Story) in Devanagari Hindi with English transliteration, Hindi meaning (arth), and free PDF download for offline recitation.

Reviewed & translated by Acharya Pushyadant Mishra

Stotra Path (स्तोत्र पाठ)

॥ श्री रविवार व्रत कथा ॥

ॐ सूर्याय नमः॥

॥ व्रत विधि ॥

रविवार का व्रत भगवान सूर्यदेव को समर्पित है। इस दिन प्रातःकाल स्नान करके लाल वस्त्र धारण करें। सूर्यदेव को जल अर्पित करें। दिन में एक ही बार भोजन करें जिसमें नमक और तेल का प्रयोग न हो। गुड़ का दान करें। सायंकाल कथा सुनें।

॥ कथा ॥

एक नगर में एक बुढ़िया रहती थी। वह बहुत गरीब थी परन्तु भगवान सूर्यदेव की बड़ी भक्त थी। वह प्रत्येक रविवार को सवेरे उठकर स्नान करती, घर की सफाई करती, आँगन को गोबर से लीपती और सूर्यदेव की पूजा करती थी। वह दिनभर व्रत रखती और सूर्यास्त के बाद बिना नमक और तेल का एक समय भोजन करती थी। वह गरीबों को गुड़ बाँटती और सूर्यदेव का स्मरण करती रहती थी।

उसकी एक पड़ोसन थी जो बहुत धनी थी। वह पड़ोसन बुढ़िया का उपहास करती थी। वह कहती — अरी बुढ़िया, तू इतनी गरीब है, तेरी पूजा से क्या होगा? तेरे भगवान तुझे कुछ नहीं दे सकते। तू व्यर्थ में भूखी रहती है। बुढ़िया कहती — बहन, भगवान सूर्यदेव सबका भला करते हैं। मुझे अपने व्रत पर पूरा विश्वास है। जो भी फल मिलेगा, प्रभु की इच्छा होगी।

पड़ोसन बुढ़िया की बात सुनकर हँसती और ताना मारती। एक रविवार को पड़ोसन ने जानबूझकर अपनी गाय को बुढ़िया के आँगन में बाँध दिया। गाय ने आँगन में गोबर कर दिया। बुढ़िया ने बिना क्रोध किये गोबर उठाया और उससे अपना आँगन लीप लिया। उसने मन में सूर्यदेव को धन्यवाद दिया कि उन्होंने आँगन लीपने के लिए गोबर भेज दिया।

सूर्यदेव बुढ़िया की निष्काम भक्ति से अत्यन्त प्रसन्न हुए। उस रात बुढ़िया को स्वप्न में सूर्यदेव ने दर्शन दिए और कहा — हे भक्त! मैं तेरी भक्ति और धैर्य से बहुत प्रसन्न हूँ। तूने कभी किसी की बुराई नहीं की, कभी अपने व्रत को नहीं तोड़ा। मैं तुझे वरदान देता हूँ कि कल सवेरे से तेरे घर में धन-धान्य की कभी कमी नहीं होगी।

प्रातःकाल जब बुढ़िया उठी तो उसने देखा कि उसका पूरा घर बदल गया है। टूटी दीवारें ठीक हो गई हैं, घर में अन्न के भण्डार भरे हुए हैं, आँगन में एक सुन्दर तुलसी का पौधा लगा है और गाय बछड़े सहित खड़ी है। बुढ़िया ने सूर्यदेव को प्रणाम किया और उनका गुणगान किया।

जब पड़ोसन ने यह देखा तो उसकी आँखें फटी रह गईं। उसके मन में ईर्ष्या जागी। उसने भी रविवार का व्रत रखने का ढोंग किया, परन्तु उसके मन में श्रद्धा नहीं थी, केवल लालच था। उसने व्रत के नियमों का पालन नहीं किया। उसने नमक-तेल खाया, किसी को दान नहीं दिया और बुढ़िया की बुराई करती रही।

सूर्यदेव को पड़ोसन का कपट और अहंकार पसन्द नहीं आया। कुछ ही दिनों में पड़ोसन का सारा धन नष्ट हो गया। उसकी गायें बीमार पड़ गईं, खेत सूख गए और घर में कलह होने लगा। तब पड़ोसन को अपनी गलती का अहसास हुआ। वह बुढ़िया के पास आई और क्षमा माँगी।

बुढ़िया ने उसे माफ कर दिया और कहा — बहन, सूर्यदेव सबका भला चाहते हैं। तुम सच्चे मन से व्रत करो, नियमों का पालन करो, किसी का उपहास मत करो। सूर्यदेव अवश्य कृपा करेंगे। पड़ोसन ने सच्चे हृदय से व्रत करना शुरू किया और धीरे-धीरे सूर्यदेव की कृपा से उसका भी जीवन सुधर गया।

॥ कथा सार ॥

जो व्यक्ति प्रत्येक रविवार को सच्चे मन से सूर्यदेव का व्रत करता है, नमक-तेल रहित भोजन करता है, गुड़ का दान करता है और घर-आँगन की स्वच्छता रखता है, उस पर सूर्यदेव की विशेष कृपा होती है। स्वास्थ्य, धन, यश और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।

॥ इति श्री रविवार व्रत कथा सम्पूर्णा ॥

Benefits (फल)

  • Traditional fasting story for Sunday (Ravivar) dedicated to Surya Dev
  • Grants health, vitality, eyesight improvement, and freedom from skin diseases
  • Observing Sunday vrat with sincerity brings wealth and prosperity
  • Especially powerful during Makar Sankranti, Chhath Puja, and Ratha Saptami
  • Listening to the Katha is an integral part of the Ravivar Vrat
  • Removes obstacles caused by weak Sun (Surya) in one's horoscope

Frequently Asked Questions

Common questions about Ravivar Vrat Katha (Sunday Fasting Story)

Ravivar Vrat Katha in Hindi with transliteration. Sunday fasting story of Surya Dev for health, vitality, wealth, and prosperity. It is dedicated to Shree Surya (श्री सूर्य), the sun god and source of all energy. worshipped for health, vitality, and success. This sacred hymn contains 14 verses and is sourced from Surya Purana.